कौरवों को हराने के लिए कृष्ण के कहने पर पांडवों ने की थी मां बगलामुखी की आराधना

nalkheda Baglamukhi mandir navratri 2021

तंत्र साधना के प्रमुख स्थलों में शामिल नलखेड़ा स्थित पीतांबरा पीठ में विराजित हैं त्रिशक्ति

नलखेड़ा, (राजेश कश्यप) अग्निपथ। नगर का पीतांबरा पीठ मां बगलामुखी मंदिर तंत्र साधना के प्रमुख स्थलों में शामिल हैं। मालवांचल में उज्जैन के बाद नलखेड़ा में स्थित मां बगलामुखी मंदिर का नाम आता है। इस शक्तिपीठ की स्थापना महाभारतकाल में हुए। भगवान कृष्ण के कहने पर ही कौरवों से विजय के लिए पांडवों ने यहां मां बगलामुखी की आराधना की थी। तब मां बगलामुखी ने प्रकट होकर पांडवों को विजयश्री का वरदान दिया था। मान्यता है कि भीम पुत्र बर्बरीक ने मां बगलामुखी प्रतिमा को यहां प्रतिष्ठित किया था।

nalkheda maa bagula mukhi navratri shringar
मां बगलामुखी

मां बगलामुखी का वर्णन कालीपुराण में मिलता है। वर्ष की दोनो नवरात्रि के दौरान इस मंदिर पर भक्तों का ताता लगा रहता हैं वही शारदीय नवरात्रि के दौरान तंत्र साधना के लिए तांत्रिकों का जमावड़ा भी यहां लगा रहता है। आगर जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर नलखेड़ा नगर के उत्तर-पश्चिम में लखुंदर (लक्ष्मण) नदी के तट पर पीताम्बरा सिद्धपीठ में त्रिशक्ति मां विराजित हैं। बीच में मां बगलामुखी दाएं मां लक्ष्मी तथा बाएं मां सरस्वती।

शिव और कालभैरव भी हैं मंदिर परिसर में

मां बगलामुखी मंदिर के बाहर 16 खंभों वाला एक सभा मंडप दिए जो विक्रम संवत 1815 सन 1759 मे पंडित इम्बुजी ने दक्षिणी कारीगर तुलाराम से बनवाया था मंदिर के ठीक सामने एक दीपमालिका है। मंदिर के परिसर में ही हनुमान मंदिर, गोपाल मंदिर व काल भैरव मंदिर भी है। मंदिर के पास ही दो शिवालय स्थित है।
मंदिर का मुख्य द्वार सिंह मुखी है तथा मंदिर परिसर में नीम पीपल चंपा चमेली आदि के पेड़ है जो साक्षात मां के होने का प्रमाण है।

दस महाविद्याओं में बगलामुखी का है विशेष महत्व

प्राचीन तंत्र ग्रंथों में दस महाविद्याओं का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि उनमें से एक है मां बगलामुखी। मां भगवती बगलामुखी का महत्व समस्त देवियों में सबसे विशिष्ट है। शास्त्र के अनुसार इस देवी की साधना आराधना से शत्रुओं का स्तम्भ हो जाता है यह साधक को भोग और मोक्ष दोनों ही प्रदान करती है।

सोमवार को उमड़ा भक्तों का सैलाब

विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर पर सोमवार को भी भक्तों का सैलाब उमड़ा। 15 हजार से अधिक लोगों ने मां के दर्शन कर पुण्य लाभ लिया। वहीं कई भक्तों द्वारा अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए हवन पूजन भी करवाए गए।

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