धार, अग्निपथ। धार जिले के बाग विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम अखाड़ा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह अस्पताल वर्षों से बिना डॉक्टर के चल रहा है, लेकिन रिकॉर्ड में फर्जी ओपीडी दर्ज की जा रही है। शासन से प्राप्त होने वाली स्वास्थ्य योजनाओं की राशि और अन्य सरकारी फंड का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है। इस स्थिति से आक्रोशित ग्रामीणों ने जनसुनवाई में धार कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
कागजों पर संचालित हो रहा अस्पताल, जमीनी हकीकत शून्य
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2017 में डॉ. वीरभद्र सिंह मुवेल की नियुक्ति अखाड़ा पीएचसी में की गई थी, तब तक अस्पताल सुचारू रूप से चल रहा था। वहां गर्भवती महिलाओं का प्रसव, मरीजों का उपचार और दवा वितरण नियमित होता था। लेकिन डॉ. मुवेल को बाग का बीएमओ (BMO) बनाए जाने के बाद यह केंद्र पूरी तरह डॉक्टर विहीन हो गया। चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल बंद होने के बावजूद प्रशासनिक रिकॉर्ड में मरीजों की संख्या और ओपीडी दर्ज की जा रही है। वर्तमान में अस्पताल का मेडिकल स्टोर बंद है, दवाइयों का वितरण ठप है और डिलीवरी सेवाएं लंबे समय से बंद पड़ी हैं।
वरिष्ठता की अनदेखी और पद के दुरुपयोग का आरोप
मामले में प्रशासनिक नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर वरिष्ठता की अनदेखी की गई। बताया जा रहा है कि वर्ष 2018 से अब तक कई बीएमओ बदले, लेकिन वर्तमान में डॉ. वीरभद्र सिंह मुवेल को सीनियरिटी की अनदेखी कर बीएमओ का प्रभार दिया गया है, जबकि यह जिम्मेदारी वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हरिसिंह मुवेल को मिलनी चाहिए थी। ग्रामीणों का कहना है कि इसी कारण अखाड़ा पीएचसी का भौतिक सत्यापन नहीं कराया जा रहा है और वरिष्ठ अधिकारी शिकायत के बावजूद मामले को टाल रहे हैं।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
परेशान ग्रामीणों ने जिला सीएमएचओ कार्यालय में भी गुहार लगाई थी, लेकिन वहां से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अब ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि अखाड़ा पीएचसी का तत्काल भौतिक सत्यापन कराया जाए और फर्जी ओपीडी व शासकीय फंड के दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, केंद्र पर स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति की मांग भी की गई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।
इनका कहना है
“आपके माध्यम से यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। मैं इस संबंध में बीएमओ से चर्चा कर पूरे मामले की जांच करवाती हूं।”
— डॉ. अनिता सिंगारे, सीएमएचओ, धार
