धार, अग्निपथ। शासन की महत्वाकांक्षी योजना के तहत जिले के विद्यार्थियों को एक ही छत के नीचे प्राथमिक से लेकर 12वीं तक की उच्च स्तरीय शिक्षा देने के लिए सांदीपनी स्कूलों का निर्माण किया जा रहा है। करोड़ों रुपये के बजट और बड़े-बड़े दावों के बावजूद धरातल पर स्थिति बेहद निराशाजनक है। जिले के 13 विकासखंडों में 400 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 15 स्कूल भवनों का निर्माण किया जा रहा है लेकिन विडंबना यह है कि तय समय सीमा बीत जाने के कई महीनों बाद भी एक भी भवन पूर्ण रूप से बनकर तैयार नहीं हो सका है। निर्माण कार्य में बरती जा रही लगातार लापरवाही ने शासन की मंशा पर पानी फेर दिया है।
समय सीमा खत्म पर काम अधूरा, नए सत्र में भी परेशानी
इन स्कूल भवनों के निर्माण के लिए अलग-अलग समय पर निविदाएं जारी की गई थीं और काम शुरू किया गया था। अधिकांश परियोजनाओं की समय सीमा वर्ष 2025 के विभिन्न महीनों में ही समाप्त हो चुकी है। अब जबकि वर्ष 2026 का अप्रैल माह शुरू होने को है और नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने वाला है, भवनों की स्थिति ऐसी नहीं है कि वहां कक्षाएं संचालित की जा सकें। ऐसे में नवीन सत्र में भी छात्र-छात्राओं और शिक्षण स्टाफ को पुराने जर्जर या छोटे भवनों में ही समय गुजारना पड़ेगा। जिला मुख्यालय पर बन रहे स्कूल की हालत भी कुछ अलग नहीं है, जहाँ कार्यालय का 50 प्रतिशत काम अब भी बाकी है और मुख्य भवन में बिजली व दरवाजों की फिटिंग का काम अधूरा पड़ा है।
दशकों पुराने भवनों में शिक्षा का अभाव और विभागों की खींचतान
सांदीपनी स्कूल की परिकल्पना तो आधुनिक शिक्षा के लिए की गई थी लेकिन वर्तमान में छात्र दशकों पुराने भवनों में अभावों के बीच पढ़ने को मजबूर हैं। इस लेटलतीफी के पीछे जनजातीय विकास विभाग और भवन विकास निगम के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। जनजातीय विकास विभाग का कहना है कि जब तक भवन पूरी तरह तैयार नहीं हो जाते, वे उन्हें अपने कब्जे में नहीं लेंगे। दूसरी ओर, भवन विकास निगम के अधिकारियों का तर्क है कि जनजातीय विभाग ने ड्राइंग और डिजाइन उपलब्ध कराने में बहुत देरी की। समय पर नक्शे न मिलने और बार-बार डिजाइन में बदलाव किए जाने के कारण काम पिछड़ता चला गया।
तिरला और कुक्षी में केवल कागजों पर काम पूरा
वर्तमान में केवल तिरला और कुक्षी क्षेत्र की स्कूल बिल्डिंगों को पूरा बताकर उन्हें विभाग को सौंपने (हैंडओवर) के लिए पत्र दिया गया है। विभागीय अधिकारियों ने इन भवनों का निरीक्षण तो किया है लेकिन अभी अंतिम रिपोर्ट आना शेष है। रिपोर्ट सकारात्मक आने के बाद ही इन्हें स्वीकार किया जाएगा। धार जिले के अन्य क्षेत्रों जैसे डही, धरमपुरी, गंधवानी और सरदारपुर में भी स्थिति चिंताजनक है। गंधवानी में तो जनवरी 2026 की समय सीमा भी निकल चुकी है।
जिले में निर्माण की स्थिति और लागत का विवरण:
| विकासखंड | लागत (लाख रुपये) | कार्य पूर्णता की समय सीमा |
| डही | 2662.75 | 12 नवंबर 2025 |
| धार | 3386.34 | 30 अप्रैल 2025 |
| धरमपुरी | 3350.65 | 1 जुलाई 2025 |
| गंधवानी | 825.27 | 19 जनवरी 2026 |
| टांडा | 3331.96 | 5 सितंबर 2025 |
| मनावर | 3525.36 | 1 जुलाई 2025 |
| नालछा | 3212.17 | 25 सितंबर 2025 |
| बाकानेर | 3058.74 | 12 मई 2025 |
| कुक्षी | 3001.26 | 24 अक्टूबर 2025 |
| निसरपुर | 3029.75 | 26 सितंबर 2025 |
| सरदारपुर | 2882.35 | 5 जून 2025 |
| तिरला | 2797.53 | 27 अगस्त 2025 |
| बाग | 4288.71 | 28 जून 2025 |
डिजाइन देर से मिली:
स्कूल भवन निर्माण के लिए ट्रायबल विभाग से ड्राइंग-डिजाइन देरी से मिली है। इसे भी पार्ट-पार्ट में दिया गया। कुछ स्थानों पर डिजाइन रिवाइज भी की गई है। हमारी और से काम में कोई लेटलतीफी नहीं है।
अविनाश अग्निहोत्री,, एसडीओ धार डिवीजन बीडीसी
