अवैध उत्खनन के खिलाफ ग्रामीणों का हल्लाबोल, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

नागदा, अग्निपथ। गांव भीमपुरा, गीदगढ़, जूना नागदा, खजूरिया, किलोड़िया और परमारखेड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों में धड़ल्ले से हो रहे अवैध उत्खनन को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी राजा जन्मेजय बस स्टैंड से रैली के रूप में पैदल मार्च करते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने कलेक्टर के नाम एक विस्तृत ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।

ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में कुछ रसूखदार व्यक्तियों और ईंट-भट्टा संचालकों द्वारा पीली मिट्टी का अवैध उत्खनन और ईंट-भट्टों का गैर-कानूनी संचालन किया जा रहा है। यह गतिविधि खनिज कानून, पर्यावरण नियमों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों का सीधा उल्लंघन है। ग्रामीणों ने मांग की है कि एक संयुक्त जांच समिति गठित कर सभी भट्टों और खनन स्थलों की जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर भारी जुर्माना वसूला जाए।

कानून की धज्जियां उड़ा रहे खनन माफिया

मध्य प्रदेश गौण खनिज नियम 1996 के अनुसार बिना वैध पट्टे के उत्खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन यहां बिना रॉयल्टी चुकाए शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाई जा रही है। अवैध खुदाई के कारण गांवों के तीनों ओर गहरी खाइयां बन गई हैं, जिससे ग्रामीणों का रास्ता बाधित हो रहा है और सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, बिना किसी पर्यावरणीय स्वीकृति के चल रहे इन भट्टों से निकलने वाले धुएं और धूल के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

मजदूरों का शोषण और सुरक्षा से खिलवाड़

ज्ञापन में श्रम कानूनों के उल्लंघन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। फैक्ट्री अधिनियम के अनुसार निर्धारित कार्य घंटों के बजाय मजदूरों से 12 से 13 घंटे काम लिया जा रहा है। मजदूरों का न तो पंजीयन है और न ही बीमा कराया गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि स्थानीय निवासियों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व खनिज विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) न लेने वाले भट्टों को तत्काल बंद किया जाए।

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