उज्जैन, अग्निपथ। आईएएस संतोष वर्मा के बेटी के विरुद्ध अपमानजनक कथन तथा समाज में घृणा एवं विद्वेष फैलाने वाले भाषण के बावजूद उसके विरुद्ध एफआईआर नहीं की गई। ग्वालियर में हिंदुओं का धार्मिक ग्रंथ मनुस्मृति को जलाया गया उसे मामले में भी एफआईआर नहीं हुई। परंतु इन दोनों मामलों में अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने वाले ग्वालियर के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा एवं उनके सात साथियों के विरुद्ध एट्रोसिटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कर लिया गया एवं उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
सपाक्स प्रवक्ता जेआर माहुरकर ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार की उक्त पक्षपात पूर्ण एवं सौतेली कार्रवाई के विरुद्ध भोपाल में बेटी के सम्मान में सर्व समाज संघर्ष मोर्चा द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार पुलिस महानिदेशक के नाम संबोधित एक ज्ञापन पूर्व इस डॉ. हीरालाल त्रिवेदी के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल द्वारा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उज्जैन को सौंपा गया। सपाक्स के प्रवक्ता जेआर माहुरकर ने बताया कि ज्ञापन सौंपने के पूर्व कार्यालय के बाहर हनुमान चालीसा का वाचन किया गया।
ज्ञापन में मांग की गई है कि संतोष वर्मा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया जाए तथा अनिल मिश्रा एडवोकेट पर एट्रोसिटी एक्ट लागू नहीं होता, अत: उसकी धाराएं हटाकर उन्हें रिहा किया जाए। प्रतिनिधि मंडल में सोनाली विजयवर्गीय, जियालाल शर्मा, माणक लाल उपाध्याय, संजय रघुवंशी, हरिसिंह पंड्या, अजीत पंडित, अजेंद्र त्रिवेदी, अमृत पंड्या, संतोष शर्मा, महेश व्यास, शमशेर सिंह तोमर, किसान संघ से दिलीप त्रिवेदी, दरबार सिंह, हरिओम शर्मा आदि बड़ी संख्या में सर्व समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
