तकनीकी समिति की पहल से राष्ट्रव्यापी पुनरुत्थान
उज्जैन, अग्निपथ। माँ सरस्वती का प्राकट्य दिवस बसंत पंचमी खंडेलवाल समाज द्वारा ‘खंडेलवाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। दुर्भाग्यवश, यह परंपरा कई स्थानों पर या तो लुप्त हो गई थी अथवा केवल संत सुंदरदास जयंती तक सीमित रह गई थी। खंडेलवाल तकनीकी विकास समिति, उज्जैन शाखा ने इस वर्ष एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए संपूर्ण भारत की लगभग 300 संस्थाओं से संपर्क कर बसंत पंचमी के दिन ही ‘खंडेलवाल दिवस’ मनाने हेतु प्रेरित किया। इसके परिणामस्वरूप देश-विदेश में यह दिवस पुनः ‘खंडेलवाल दिवस’ के रूप में मनाने की परंपरा सशक्त रूप से पुनर्स्थापित हुई।
इसी क्रम में उज्जैन समाज द्वारा संपूर्ण वैश्विक खंडेलवाल समाज के कल्याण हेतु यज्ञ, पूजन एवं विद्या-वर्द्धन संस्कार का भव्य आयोजन प्रातः 10 से 12:30 बजे के शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ। इस आयोजन में इंदौर, रतलाम, आगर एवं नलखेड़ा से पधारे प्रमुख समाजबंधुओं ने हवन-पूजन में सहभागिता कर आयोजन को गरिमा प्रदान की। हवन में भगवान गणेश, माँ सरस्वती, नवग्रह, नवदुर्गा स्वरूप में सभी कुलदेवियों का आवाहन कर विधिवत आहुतियाँ प्रदान की गईं।
सम्मानित किया
कार्यक्रम का शुभारंभ 7 वर्षीय बालिका गौरांशी खंडेलवाल द्वारा गणेश स्तोत्र एवं मेघा स्तोत्र के मधुर पाठ से हुआ, जिसकी स्वर लहरियों ने उपस्थित जनसमूह को माँ सरस्वती की सजीव अनुभूति करा दी। इस अवसर पर इंदौर से पधारे वरिष्ठ समाजसेवी एवं उद्योगपति संतोष माचीवाल एवं संध्या माचीवाल को उनकी आजीवन समाजसेवा के लिए “समाज रत्न सम्मान” से सम्मानित किया गया।
वहीं इंदौर के समाजसेवी कैलाश रावत, रतलाम के उद्योगपति एवं समाजसेवी उमेश झालानी, आगर से संतोष मेथी, नलखेड़ा से आशीष खंडेलवाल, उज्जैन से रामप्रकाश रामी को उनके द्वारा कुलदेवी स्थलों के निर्माण एवं संरक्षण हेतु तथा मोहन मुकुल को उनके विशिष्ट संस्कारिक ज्ञान एवं पूजन-हवन की उत्कृष्ट संपन्नता हेतु “समाज गौरव सम्मान” से अलंकृत किया गया।
आयोजन को सफल बनाने में उज्जैन से महेश झालानी, ओमप्रकाश माचीवाल, राधेश्याम माचीवाल, रमेश गुप्ता, अजय तंबोलिया, एन.एल. गुप्ता, मुकेश मेथी, सुशील सामरिया, सत्यनारायण नाटानी, राजीव झालानी, संजय मेहरवाल, कैलाश पाबूवाल, रमेश रावत, दीपक सोखिया, महेश कासलीवाल, प्रेमनारायण हल्दिया, दीपक बड़ेरा, मनोहर झालानी, विनीत आकड़ सहित अनेक समाजबंधुओं का सहयोग अत्यंत सराहनीय रहा। कार्यक्रम का सबसे भावपूर्ण एवं प्रेरणादायक उपसंहार 2 से 10 वर्ष तक के बच्चों के विद्या-वर्द्धन संस्कार के रूप में हुआ। बच्चों एवं उनकी माताओं ने कुमकुम से ओम एवं स्वस्तिक चिन्ह बनाकर माँ सरस्वती से आजीवन विद्या, विवेक एवं संस्कारों का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना की। संपूर्ण आयोजन का संयोजन, प्रबंधन अशोक खंडेलवाल (चिकित्सा संसार) द्वारा किया गया।
