उज्जैन, अग्निपथ। मध्य प्रदेश सरकार को एक बार फिर किसानों के कड़े रुख के आगे झुकना पड़ा है। उज्जैन-इंदौर और उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को लेकर चल रहा लंबा विवाद अब सुलझता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई सकारात्मक चर्चा के बाद सरकार ने न केवल सड़क की ऊंचाई कम करने का फैसला किया है, बल्कि किसानों को मुआवजे की राशि बढ़ाने का ठोस आश्वासन भी दिया है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद किसानों ने अपना प्रस्तावित आंदोलन और कलेक्ट्रेट का घेराव स्थगित कर दिया है।
सड़क की ऊंचाई और कनेक्टिविटी पर बनी सहमति
पिछले डेढ़ साल से किसान इस बात का विरोध कर रहे थे कि प्रस्तावित सड़क की ऊंचाई 15 से 20 फीट रखी गई थी, जिससे गांवों की आपसी कनेक्टिविटी पूरी तरह बाधित हो रही थी। किसानों की मांग थी कि सड़क को जमीन के स्तर पर ही बनाया जाए। सरकार ने अब इस एक्सेस कंट्रोल प्लान में बदलाव करते हुए सड़क की ऊंचाई कम करने और गांवों के रास्तों को सुगम बनाए रखने पर सहमति दे दी है।
मुआवजे की राशि में होगा इजाफा
प्रशासन और किसान नेताओं के बीच हुई बैठक में यह तय किया गया कि जावरा-उज्जैन मार्ग से प्रभावित होने वाले किसानों को भी उज्जैन-इंदौर रोड के समान ही उच्च दर पर मुआवजा दिया जाएगा। कलेक्टर रोशन सिंह ने स्पष्ट किया कि जमीन का अधिग्रहण अब बाजार की वर्तमान दरों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इससे उज्जैन, इंदौर और रतलाम जिलों के उन 89 गांवों के हजारों किसानों को लाभ होगा जिनकी जमीन इस प्रोजेक्ट के दायरे में आ रही है।
टल गया बड़ा आंदोलन
बुधवार को करीब 1,000 किसान 150 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, राशन और बिस्तरों के साथ उज्जैन कूच करने की तैयारी में थे। किसानों का इरादा कलेक्ट्रेट के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने का था। हालांकि, प्रशासन की सक्रियता और मुख्यमंत्री के बुलावे के बाद केवल प्रतिनिधिमंडल ही चर्चा के लिए पहुंचा और मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझ गया। यह दूसरी बार है जब उज्जैन क्षेत्र में किसानों के दबाव के कारण सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं।
