उज्जैन में बड़ी कार्रवाई: गैरेज की आड़ में बन रही थी मौत की खुराक

करोड़ों के सिंथेटिक ड्रग्स MDMA बनाने की साजिश नाकाम

उज्जैन, अग्निपथ। धार्मिक नगरी उज्जैन में पुलिस ने नशा माफियाओं के एक ऐसे खतरनाक मंसूबे को ध्वस्त किया है, जो शहर की फिजा में सिंथेटिक जहर घोलने की तैयारी में थे। चिमनगंज मंडी थाना पुलिस ने आगरा रोड स्थित एक गैरेज पर दबिश देकर सिंथेटिक ड्रग्स MDMA (मिथाईल एनीडियोक्सी मेथामफेटामाइन) बनाने की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में प्रतिबंधित केमिकल्स, लाखों की नकदी और फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। इस पूरी कार्रवाई में अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क के तार जुड़ते नजर आ रहे हैं।

मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने डाला डेरा

4 अप्रैल 2026 को पुलिस को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि आगरा रोड स्थित ‘कृष्णा मोटर्स’ नामक गैरेज में अवैध रूप से भारी मात्रा में रसायनों का स्टॉक किया गया है। सूचना यह भी थी कि इन केमिकल्स का उपयोग सामान्य कार्यों के लिए नहीं, बल्कि हाई-प्रोफाइल पार्टियों में इस्तेमाल होने वाली MDMA जैसी घातक ड्रग्स बनाने के लिए किया जाना है। सूचना मिलते ही पुलिस की संयुक्त टीम ने तत्काल घेराबंदी की और मुख्य आरोपी अर्पित उर्फ सौरभ गुप्ता को रंगे हाथों दबोच लिया।

गुजरात से मंगाया जा रहा था मौत का सामान

पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपी अर्पित गुप्ता फर्जी बिलिंग और जाली दस्तावेजों के सहारे गुजरात की विभिन्न केमिकल कंपनियों से संपर्क में था। वह वहां से ‘ब्रोनोपोल’ (Bronopol) और ‘2-ब्रोमो-4-मिथाइल प्रोपियोफेनोन’ जैसे खतरनाक और प्रतिबंधित पदार्थ मंगवा रहा था। इन केमिकल्स का सीधा इस्तेमाल सिंथेटिक ड्रग्स तैयार करने की लैब में किया जाता है। पुलिस अब उन कंपनियों की भी जांच कर रही है जिन्होंने बिना उचित सत्यापन के यह संवेदनशील माल सप्लाई किया।

भारी मात्रा में केमिकल और नकदी बरामद

गैरेज पर दी गई दबिश के दौरान पुलिस ने जो सामान जब्त किया है, वह इस बात की पुष्टि करता है कि यह नेटवर्क काफी समय से सक्रिय होने की तैयारी में था। पुलिस ने मौके से निम्नलिखित सामान बरामद किया है:

  • 75 किलोग्राम ब्रोनोपोल क्रिस्टल पाउडर: इसकी अनुमानित कीमत करीब 48 हजार रुपये बताई जा रही है, जिससे भारी मात्रा में ड्रग्स तैयार की जा सकती थी।

  • 8.50 लाख रुपये नकद: यह राशि ड्रग्स सौदे और केमिकल खरीदी से जुड़ी मानी जा रही है।

  • फर्जी दस्तावेज: पुलिस को तीन फर्जी बिल मिले हैं, जिनका इस्तेमाल पुलिस और प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए किया गया था।

  • वाहन जब्ती: तस्करी और परिवहन में उपयोग की जा रही एक बलेनो कार को भी पुलिस ने अपनी कस्टडी में लिया है।

तीन आरोपी गिरफ्तार, झालावाड़ से जुड़े तार

इस मामले में पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें उज्जैन निवासी अर्पित उर्फ सौरभ गुप्ता, मंदसौर निवासी रंजीत और आगर मालवा निवासी ओमप्रकाश शामिल हैं। चिमनगंज थाना प्रभारी गजेंद्र पचौरिया के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों के तार राजस्थान के झालावाड़ जिले से भी जुड़े हुए हैं। पूछताछ में पता चला है कि आरोपी झालावाड़ के कुछ संदिग्ध लोगों के लगातार संपर्क में थे, जो ड्रग्स की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन का हिस्सा हो सकते हैं।

पेंट और कलर की आड़ में काला धंधा

आरोपी सौरभ गुप्ता मूल रूप से गैरेज में काम करता है। उसने पूछताछ में बताया कि उसे किसी ने यह झांसा दिया था कि इन केमिकल्स का उपयोग पेंट और कलर बनाने में किया जाता है। उसे लालच दिया गया था कि यह ‘एक नंबर’ का माल है और इसे गैरेज में रखने के बदले उसे अच्छा कमीशन मिलेगा। पुलिस को संदेह है कि सौरभ इस धंधे में नया है और उसे मोहरा बनाकर बड़े माफिया अपना नेटवर्क फैला रहे थे। आरोपियों के फ्रीगंज और आगरा रोड पर दो गैरेज होने की जानकारी भी सामने आई है।

कानून की सख्ती और प्रतिबंधित केमिकल्स

जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी आया कि जिस वक्त इन रसायनों को मंगवाया गया था, तब उन पर कड़ा प्रतिबंध नहीं था। भारत सरकार ने 11 मार्च 2026 को इन विशिष्ट रसायनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है, जबकि आरोपियों ने इसका स्टॉक जनवरी में ही जमा कर लिया था। नियम के अनुसार, ऐसे संवेदनशील केमिकल्स को मंगवाने के लिए ‘एंड यूज सर्टिफिकेट’ (End Use Certificate) देना अनिवार्य होता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इनका उपयोग बम बनाने या ड्रग्स बनाने जैसे कार्यों में न हो। आरोपियों ने पेंट कार्य का बहाना बनाकर इस नियम की धज्जियां उड़ाईं।

संयुक्त टीम की बड़ी सफलता

यह सफल कार्रवाई चिमनगंज मंडी थाना पुलिस, साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम द्वारा की गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर समय रहते यह कार्रवाई न होती, तो उज्जैन और आसपास के जिलों में सिंथेटिक ड्रग्स की एक बड़ी खेप पहुंच सकती थी। फिलहाल पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क का असली मास्टरमाइंड कौन है और गुजरात से लेकर राजस्थान तक इसमें और कौन-कौन शामिल हैं।

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