उज्जैन, अग्निपथ। विश्व प्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर मंदिर के समीप स्थित बेगमबाग क्षेत्र में मंगलवार को प्रशासन का बुलडोजर एक बार फिर गर्जा। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से 16 अवैध इमारतों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। इस बड़ी कार्रवाई के बाद महाकाल लोक और मंदिर के मुख्य प्रवेश मार्ग (नीलकंठ द्वार) के आसपास का बड़ा इलाका अब अतिक्रमण मुक्त और साफ नजर आने लगा है।
लीज खत्म होने और व्यावसायिक उपयोग पर चला पंजा
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बेगमबाग की यह बेशकीमती भूमि उज्जैन विकास प्राधिकरण की है। पूर्व में यह जमीन केवल आवासीय उपयोग के लिए लीज शर्तों पर आवंटित की गई थी। जांच में पाया गया कि आवंटित जमीन पर न केवल अवैध रूप से व्यावसायिक निर्माण कर लिए गए, बल्कि इन संपत्तियों की आवासीय लीज भी 10 साल पहले ही समाप्त हो चुकी थी। लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद न्यायालय ने उज्जैन विकास प्राधिकरण के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके तत्काल बाद इन अवैध ढांचों को ढहाने की योजना बनाई गई।
भारी पुलिस बल के बीच सुबह से शुरू हुआ अभियान
मंगलवार तड़के जब शहर जाग रहा था, तभी भारी पुलिस बल के साथ प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया। किसी भी अप्रिय स्थिति या विरोध से निपटने के लिए क्षेत्र में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आधा दर्जन से अधिक पोकलेन और बुलडोजर मशीनों ने एक-एक कर अवैध बिल्डिंगों को तोड़ना शुरू किया। शाम तक चली इस कार्रवाई में यूडीए अब तक कुल 58 संपत्तियों पर अपना कब्जा प्राप्त कर चुका है, जिसमें से मंगलवार को 16 और इससे पूर्व 24 भवन तोड़े जा चुके हैं।
मौके पर डटे रहे आला अधिकारी
कार्रवाई की गंभीरता को देखते हुए एडीएम एल.एन. गर्ग और यूडीए सीईओ संदीप सोनी सहित पुलिस और प्रशासन के कई आला अधिकारी पूरे समय मौके पर मौजूद रहे। अवैध निर्माणों को ढहाने के साथ-साथ मलबे के प्रबंधन के लिए नगर निगम की टीम भी सक्रिय रही। नगर निगम के 40 से अधिक कर्मचारियों ने अभियान के दौरान सफाई व्यवस्था संभाली ताकि श्रद्धालुओं के आवागमन में कोई बाधा उत्पन्न न हो।
महाकाल लोक की सुंदरता और सुरक्षा में होगा इजाफा
इस अतिक्रमण विरोधी अभियान का मुख्य उद्देश्य महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मार्ग को सुगम बनाना और मंदिर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना है। नीलकंठ द्वार के पास से अवैध निर्माण हटने के बाद अब इस क्षेत्र का सौंदर्यीकरण अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
