दिन का ढाई डिग्री उछला, विजिबिलिटी 2 से 4 किमी रही
उज्जैन, अग्निपथ। मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का दौर जारी है। बीती रात शहर की न्यूनतम तापमान 2 डिग्री के लगभग गिर गया। हालांकि कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे के चलते जिला शिक्षा अधिकारी ने 1 से 8 तक की कक्षा की स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी थी, जिसके चलते बच्चों और उनके परिजनों को काफी राहत मिली।
शहर में सोमवार मंगलवार दरमियानी रात में तापमान में 1.7 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। घने कोहरे का असर उज्जैन में भी देखा गया। इस दौरान विजिबिलिटी 2 से 4 किमी रही। हालांकि दिन में धूप निकलने के कारण लोगों को काफी राहत अनुभव हुई। दिन का पारा 2.5 डिग्री की बड़ी उछाल लेकर 25 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
इस बार कड़ाके की ठंड का दौर
इस बार नवंबर-दिसंबर की सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी तो दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। मौसम विभाग ने नवंबर-दिसंबर की तरह ही जनवरी में भी कड़ाके की ठंड पडऩे का अनुमान जताया है। एक्सपर्ट की माने तो अबकी बार भी तेज सर्दी, घना कोहरा छाने के साथ शीतलहर भी चल रही है।
ठंड के लिए इसलिए खास जनवरी
मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्परेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं।
उज्जैन में जीरो डिग्री रह चुका पारा
उज्जैन में भी उत्तरी हवा का असर रहता है। इस वजह से यहां कड़ाके की ठंड पड़ती है। 22 जनवरी 1962 को पारा 0 डिग्री सेल्सियस रहा था। पिछले 10 साल में टेम्प्रेचर 2 से 5.8 डिग्री सेल्सियस तक रह चुका है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड 11 जनवरी 1987 के नाम है। इस दिन सवा इंच पानी गिरा था। वहीं, सर्वाधिक कुल मासिक 2.2 इंच 1994 को हुई थी।
