कड़ाके की ठंड ने ली दो मासूमों की जान: बदनावर में मातम, प्रशासन पर उठे सवाल

बदनावर (धार), अग्निपथ। मध्य प्रदेश के धार जिले में भीषण शीतलहर का कहर अब जानलेवा साबित हो रहा है। बदनावर क्षेत्र में पिछले 24 घंटों के भीतर दो मासूम बच्चियों की ठंड के कारण दुखद मौत हो गई। पहली घटना नवोदय विद्यालय की है, जहां खेल के मैदान में एक छात्रा की सांसे थम गईं, वहीं दूसरी घटना में समय पर इलाज और एंबुलेंस न मिलने के कारण एक 10 वर्षीय बालिका ने दम तोड़ दिया।

केस 1: नवोदय स्कूल में पीटी के दौरान ‘साइलेंट अटैक’

बदनावर के मुलथान स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में मंगलवार सुबह एक हृदयविदारक घटना घटी। कक्षा छठी की 13 वर्षीय छात्रा निशा सूर्यवंशी, पिता राहुल सूर्यवंशी (निवासी ग्राम मुलथान) रोज की तरह सुबह करीब 7:15 बजे अपने सहपाठियों के साथ मैदान में पीटी (शारीरिक प्रशिक्षण) कर रही थी। अभ्यास के दौरान निशा अचानक बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ी।

मैदान में मौजूद शिक्षकों ने तत्काल उसे संभाला, लेकिन शरीर में कोई हलचल न पाकर उसे तुरंत सिविल अस्पताल बदनावर ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल के डॉक्टर कृष्णा राठौड़ ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह ‘साइलेंट अटैक’ का मामला लग रहा है, जो भीषण ठंड के कारण आ सकता है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। इस घटना से स्कूल और गांव में मातम पसरा है।

केस 2: एंबुलेंस के अभाव में बस स्टैंड पर तोड़ा दम

दूसरी दुखद घटना बदनावर की डेरखा (भरतगढ़) पंचायत के मजरे जमुनिया नाका की है। यहां 10 साल की लक्ष्मी, पिता राधेश्याम भील को कड़ाके की ठंड लग गई (ठंड चिपकना)। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे बदनावर अस्पताल लाए, जहां से उसे रतलाम मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। रतलाम में भी सरकारी मदद न मिलने पर परिजनों को निजी अस्पताल जाने की सलाह दी गई, लेकिन वहां उपचार के दौरान लक्ष्मी की मौत हो गई।

परिजनों की बेबसी तब और बढ़ गई जब मृत बच्ची को वापस गांव ले जाने के लिए रतलाम में कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। मजबूर पिता अपनी मृत संतान को गोद में लेकर बस में बैठकर बदनावर बस स्टैंड पहुंचे। रात के सन्नाटे में जब मां की चीखें गूंजी, तो बस एजेंट भरत माली और स्थानीय लोगों ने मदद का हाथ बढ़ाया। निजी एंबुलेंस की व्यवस्था कर और आर्थिक सहायता जुटाकर रात में ही शव को गांव भिजवाया गया।

जिम्मेदारों की चुप्पी और जनता का आक्रोश

इन दोनों घटनाओं ने प्रशासन की व्यवस्थाओं और कड़ाके की ठंड में स्कूलों के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां ग्वालियर, उज्जैन और भिंड जैसे जिलों में छुट्टियों की घोषणा कर दी गई है, वहीं धार जिले में केवल समय परिवर्तन (सुबह 10 बजे) के भरोसे मासूमों को जोखिम में डाला जा रहा है। जमुनिया नाका की घटना ने स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस सेवाओं की पोल भी खोल दी है, जिससे स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है।

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