कायथा, अग्निपथ। नगर का कायथा थाना पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से बिना किसी स्थायी नेतृत्व के संचालित हो रहा है। जिला पुलिस कप्तान प्रदीप शर्मा द्वारा तत्कालीन थाना प्रभारी राजकुमार मालवीय को हटाए जाने के बाद से अब तक यहाँ नए थाना प्रभारी की पदस्थापना नहीं हो सकी है। नेतृत्व के इस अभाव ने न केवल प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित किया है, बल्कि स्थानीय कानून व्यवस्था को लेकर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
52 गांवों की सुरक्षा का जिम्मा, पर कमान किसी के पास नहीं
कायथा थाना क्षेत्र के अंतर्गत करीब 52 गांव आते हैं। इतने विस्तृत और संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा वर्तमान में कामचलाऊ व्यवस्था के भरोसे चल रही है। स्थायी थाना प्रभारी न होने से पुलिस की कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की क्षमता पर असर पड़ रहा है। विशेष रूप से आगामी होली के पर्व को देखते हुए, क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
बढ़ते अपराधों ने उड़ाई नींद: जांच की रफ्तार हुई सुस्त
क्षेत्र में हाल के दिनों में लूट, मोटरसाइकिल चोरी और किसानों के खेतों से मोटर पंप चोरी जैसी वारदातों में इजाफा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभारी व्यवस्था के कारण इन गंभीर मामलों की जांच ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। अपराधियों में पुलिस का खौफ कम हो रहा है, जिससे आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।
तेज-तर्रार प्रभारी की मांग
नगरवासियों और जनप्रतिनिधियों ने जिला पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि कायथा थाने की कमान जल्द से जल्द किसी अनुभवी और सख्त अधिकारी को सौंपी जाए। उनका मानना है कि एक स्थायी और सक्रिय नेतृत्व ही लंबित मामलों को सुलझाने और क्षेत्र में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने में सक्षम होगा। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन कब तक यहाँ नए मुखिया की नियुक्ति करता है।
