कार्रवाई का इंतजार
उज्जैन, अग्निपथ। कार्तिक मेला ग्राउंड पर 4.50 करोड़ रुपये की लागत से बने मुख्य द्वार के छज्जे के गिरने के मामले में जांच रिपोर्ट तो आ गई है, लेकिन कार्रवाई की फाइल अब भी दबी हुई है। पिछले साल जुलाई 2025 में बारिश के दौरान यह नवनिर्मित छज्जा गिर गया था। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में ठेकेदार, कंसल्टिंग एजेंसी और निगम के कई वरिष्ठ इंजीनियरों को दोषी पाया है, मगर दोषियों पर अब तक कोई गाज नहीं गिरी है।
हैरानी की बात यह है कि 4.50 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी यह निर्माण पहली बारिश तक नहीं झेल पाया। लापरवाही का आलम यह रहा कि गिरने के बाद छज्जे का आधा हिस्सा करीब 4 महीने तक खतरनाक तरीके से लटका रहा, जिसे बाद में हटाया गया। प्रोजेक्ट का काम प्रभारी कार्यपालन यंत्री अनिल जैन की देखरेख में चल रहा था। मुख्य ठेकेदार रियाजुद्दीन अजीज खान ने यह काम पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर जावेद खान को दे दिया था, जिसके कारण गुणवत्ता से समझौता हुआ और करोड़ों की लागत से बना द्वार क्षतिग्रस्त हो गया।
रिपोर्ट में ये दिग्गज पाए गए दोषी, लेकिन कार्रवाई सिफर
अपर आयुक्त पवन सिंह द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट 10 नवंबर 2025 को ही निगम आयुक्त को सौंप दी थी। इस रिपोर्ट में सुलेमान कंसल्टिंग एजेंसी प्रा.लि. भोपाल, ठेकेदार, प्रभारी कार्यपालन यंत्री अनिल जैन, सहायक यंत्री सुनील जैन और उपयंत्री पराग अग्रवाल को सीधे तौर पर दोषी माना गया है। जांच रिपोर्ट आए 3 महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन नगर निगम प्रशासन ने अब तक किसी पर भी ठोस कार्रवाई नहीं की है।
वहीं, जांच के दौरान कुछ अधिकारियों को “अभयदान” देने के भी आरोप लग रहे हैं। चर्चा है कि जांच समिति ने तत्कालीन कार्यपालन यंत्री पीसी यादव, अधीक्षण यंत्री संतोष गुप्ता और डूंगरसिंह परिहार को इस मामले से साफ बचा लिया, जबकि ये अधिकारी भी किसी न किसी रूप में इस निर्माण कार्य से जुड़े हुए थे।
लोक निर्माण प्रभारी ने जताई नाराजगी, कहा- निगमायुक्त को दिलाऊंगा याद
। इस पूरे मामले में नगर निगम के लोक निर्माण विभाग प्रभारी शिवेंद्र तिवारी ने सख्त रुख अपनाया है। उनका कहना है कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। गनीमत रही कि हादसे के वक्त कोई वहां मौजूद नहीं था, वरना बड़ी जनहानि हो सकती थी। मुख्य ठेकेदार द्वारा पेटी कॉन्ट्रैक्टर से काम कराना नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे व्यक्तिगत रूप से निगमायुक्त के संज्ञान में यह मामला लाएंगे और जवाबदेही तय करवाएंगे।
