काशी और अयोध्या में गूंजा मालवा का स्वर: बडऩगर की प्रभात फेरी ने जगाया भक्ति का अलख

बडऩगर, (अजय राठौड़) अग्निपथ। अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की खुशी में शुरू हुई प्रभात फेरियों का सिलसिला अब सात समंदर पार और देश के कोने-कोने तक पहुँच रहा है। इसी कड़ी में बडऩगर के श्री द्वारकाधीश प्रभात फेरी भक्त मण्डल (शिवाजी रोड) ने एक अनूठी मिसाल पेश की है।

पिछले दो वर्षों से ठंड, गर्मी और बरसात की परवाह किए बिना प्रतिदिन नगर की गलियों में राम नाम गुंजाने वाली इस टोली ने अब काशी और अयोध्या की पावन धरती पर भी अपनी भक्ति का परचम फहराया है। 5 से 9 जनवरी 2026 तक आयोजित इस 5 दिवसीय धर्म यात्रा ने भक्ति और उत्साह का एक ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जिसे देख हर कोई भाव-विभोर हो उठा।

महाकाल की नगरी से शुरू हुआ भक्ति का कारवां

5 जनवरी 2026 को उज्जैन में बाबा महाकाल के जयकारों के साथ इस यात्रा का शंखनाद हुआ। इस यात्रा की सबसे खास बात इसकी विविधता रही; जहाँ एक ओर 8 साल के नन्हे बालक का उत्साह था, वहीं 80 साल के बुजुर्ग की अटूट आस्था भी साथ चल रही थी। रेलगाड़ी के डिब्बों में जब झांझ-मंजीरों की थाप पर ‘रामजी की निकली सवारी’ जैसे भजन गूंजे, तो अन्य यात्री भी खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। चलती ट्रेन में निकाली गई इस प्रभात फेरी ने पूरे कोच को राममय कर दिया।

काशी में हर-हर महादेव और अयोध्या में जय श्री राम की गूंज

काशी पहुँचते ही कडक़ड़ाती ठंड के बीच भक्तों ने गंगा तट पर डुबकी लगाई और बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी भरी। इसके पश्चात यात्रा का अगला पड़ाव प्रभु श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या रहा। सुबह 6 बजे की ठिठुरन में जब बडऩगर की मंडली सीता राम-जय सीता राम का संकीर्तन करते हुए रामलला के मंदिर परिसर पहुँची, तो वहां का वातावरण पूरी तरह बदल गया। हनुमान गढ़ी पर भक्तों ने जब सुर-लय-ताल के साथ सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया, तो वहां मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे। सरयू तट पर पूजन-अर्चन कर चुनरी भेंट की गई और विश्व मंगल की कामना की गई।

सरयू तट पर हुआ मालवा और हिमाचल की संस्कृतियों का मिलन

इस यात्रा के दौरान एक अद्भुत नजारा तब देखने को मिला जब सरयू के तट पर बडऩगर की मंडली और हिमाचल प्रदेश से आए तीर्थयात्रियों का आमना-सामना हुआ। यहाँ एक भारत-श्रेष्ठ भारत की तस्वीर साफ दिखाई दी। हिमाचल के यात्रियों ने अपनी स्थानीय भाषा के गीतों पर नृत्य किया, तो मालवा के भक्तों ने भी उनके सुर में सुर मिलाकर जमकर ठुमके लगाए। यह दो संस्कृतियों का मिलन भक्ति के एक ही रंग—राम नाम के रंग—में रंगा नजर आया।

बडऩगर में हुआ भव्य स्वागत

यात्रा के सफल समापन के बाद जब भक्त मंडल वापस बडऩगर पहुँचा, तो नगरवासियों ने पलक-पावड़े बिछाकर उनका स्वागत किया। ढोल-ढमाकों, पुष्प वर्षा और भजनों के साथ यात्रियों की अगवानी की गई। भक्त मंडल ने बताया कि इससे पूर्व भी वे सांवरिया जी, गिरिराज जी और खाटूश्याम जी की सफल यात्राएं कर चुके हैं। काशी और अयोध्या में हुए आधुनिक विकास और भव्य मंदिर निर्माण को देखकर सभी यात्री अभिभूत नजर आए। अंत में बस यही स्वर गूंज रहा था— कुछ तो है सरकार तेरी भक्ति में, क्या रखा है झूठी दुनिया की मक्कारी में।

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