किसानों ने घेरा कलेक्टर कार्यालय: नरवाई जुर्माने और फसल नुकसान पर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

धार, अग्निपथ। भारतीय किसान संघ के बैनर तले सोमवार को धार जिले के 12 गांवों के किसानों और समिति सदस्यों ने अपनी ज्वलंत समस्याओं को लेकर कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन किया। चिकलिया, बोरदा, खरमपुर और आहू सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आए किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन कृषि विभाग के उपसंचालक ज्ञान सिंह मोहनिया को सौंपा। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे शासन की नीतियों से नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन में होने वाली विसंगतियों से परेशान हैं।

नरवाई विवाद: शॉर्ट सर्किट से लगती है आग, किसान क्यों भुगते जुर्माना?

ज्ञापन में सबसे प्रमुख मुद्दा नरवाई जलाने पर लगने वाले जुर्माने का रहा। जहाँ उपसंचालक मोहनिया ने पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण का हवाला देते हुए शासन के आदेशानुसार कार्रवाई की बात कही, वहीं किसान प्रतिनिधि विष्णु मुकाती और मोहनलाल पाटीदार ने कड़ा प्रतिवाद किया। किसानों का कहना है कि वे स्वयं कभी नरवाई नहीं जलाते, बल्कि खेतों के ऊपर से गुजरने वाली जर्जर बिजली लाइनों में शॉर्ट सर्किट होने से नरवाई और खड़ी फसलों में आग लग जाती है। किसानों ने मांग की कि ऐसे मामलों में बिना जांच किए उन पर दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।

बेमौसम बारिश और नीलगायों का आतंक

किसानों ने प्रशासन का ध्यान 18 और 19 फरवरी 2026 की रात हुई ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश की ओर भी आकर्षित किया। इस प्राकृतिक आपदा से गेहूं की फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जो अब मानक (FAQ) के अनुरूप नहीं रही। किसानों ने मांग की कि प्रभावित खेतों का तत्काल सर्वे कराकर आरबीसी की धारा 64 के तहत उचित मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा, क्षेत्र में नीलगायों (घोड़ा रोज) द्वारा फसलों को पहुंचाए जा रहे भारी नुकसान को रोकने के लिए उन्हें पकड़कर अभयारण्य में छोड़ने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

गेहूं खरीदी और फसल बीमा में सुधार की दरकार

आगामी रबी सीजन को देखते हुए किसानों ने प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर गेहूं खरीदी केंद्र खोलने और कटाई के लिए हार्वेस्टर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का आग्रह किया। साथ ही, फसल बीमा योजना की डब्लूएसएल (WSL) लिमिट हटाने और वास्तविक नुकसान झेलने वाले किसानों को बीमा राशि का पूरा लाभ दिलाने की मांग की गई। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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