खरगोन, अग्निपथ। वर्षों की लंबी चुप्पी के बाद आखिरकार खरगोन जिले में अवैध शराब की बिक्री को लेकर कांग्रेस की आवाज बुलंद हुई है। जिले का शायद ही कोई ऐसा गांव बचा हो, जो अवैध शराब के काले कारोबार से त्रस्त न हो। स्थिति यह है कि जिले भर से महिलाएं अपने परिवारों को बचाने और शराब बंदी की मांग को लेकर लगातार कलेक्टर कार्यालय पहुंच रही हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई धरातल पर नजर नहीं आई है। आखिर इन पीड़ित महिलाओं की सुनवाई क्यों नहीं हो रही और प्रशासन इस पर अंकुश लगाने में नाकाम क्यों है, ये सवाल अब सियासी गलियारों में गूंज रहे हैं।
आबकारी विभाग और ठेकेदारों के गठजोड़ का आरोप
इन्हीं ज्वलंत सवालों को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाईक ने कलेक्टर से मुलाकात कर तीखी शिकायत दर्ज कराई है। मीडिया से चर्चा करते हुए नाईक ने सीधा आरोप लगाया कि खरगोन के गांव-गांव में आबकारी विभाग के संरक्षण में ठेकेदारों द्वारा एजेंटों के माध्यम से खुलेआम शराब बेची जा रही है। उन्होंने कहा कि जिले के होटलों और ढाबों पर भी यह कारोबार बेखौफ चल रहा है। आरोप है कि आबकारी विभाग, पुलिस और शराब ठेकेदार मिलकर इस अवैध धंधे से करोड़ों रुपये कमा रहे हैं, जबकि इसका खामियाजा आम जनता और वे माता-बहनें भुगत रही हैं जो न्याय की उम्मीद में दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं।
जिम्मेदारी निभाने वाले ही बने पहरेदार!
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिन अधिकारियों पर अवैध शराब रोकने की जिम्मेदारी है, वे खुद इस तंत्र का हिस्सा बन चुके हैं। यही कारण है कि रोक लगाने के बजाय जिले में अवैध शराब का कारोबार और अधिक धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तत्काल प्रभाव से इस अवैध कारोबार पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया, तो कांग्रेस पार्टी पीड़ित महिलाओं को साथ लेकर एक विशाल जनआंदोलन खड़ा करेगी।
क्या रंग लाएगा कांग्रेस का यह ऐलान?
कांग्रेस ने अपनी ओर से आंदोलन की घोषणा तो कर दी है, लेकिन अब यह भविष्य के गर्त में है कि क्या पार्टी वास्तव में इन पीड़ित महिलाओं की आवाज बनकर सड़क पर उतरेगी या यह केवल एक राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाएगी। क्या प्रशासन इस चेतावनी के बाद हरकत में आएगा या अवैध शराब का यह खेल बदस्तूर जारी रहेगा, इस पर पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं।
