सीहोर, अग्निपथ। जब व्यवस्थाएं मौन हो जाएं और शासन-प्रशासन के वादे कागजों तक सीमित रह जाएं, तो आस्था ही अंतिम सहारा बचती है। कुछ ऐसा ही भावुक कर देने वाला नजारा बुधवार को श्री चिंतामन सिद्ध गणेश मंदिर में देखने को मिला। यहाँ किसी बड़े राजनेता या समाजसेवी ने नहीं, बल्कि ‘सीवन पुत्र’ और ‘सीवन पुत्री’ कहे जाने वाले नन्हे बच्चों ने बप्पा के चरणों में अपना दुखड़ा सुनाया। नन्हीं शिवा जायसवाल और बालक अथर्व चावड़ा ने अपनी मरती हुई ‘सीवन नदी’ को बचाने के लिए भगवान गणेश को एक ज्ञापन सौंपा, जिसने हर देखने वाले की आँखें नम कर दीं।
गंदगी के ढेर में सिसकती आस्था की जीवनदायिनी
बच्चों ने अपनी अर्जी में बड़े ही मार्मिक ढंग से निवेदन किया— “गणेश जी, हमारी मां सीवन को बचा लीजिए, उसकी हालत बहुत खराब है।” आज जिस सीवन नदी की ख्याति राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर है, जिसका जल कावड़ यात्रा के दौरान महादेव पर अर्पित किया जाता है, वही नदी आज कचरे, पूजन सामग्री और गंदगी के ढेर में सिसक रही है। बच्चों ने बप्पा से गुहार लगाई कि वे लोगों को सुबुद्धि दें ताकि वे नदी में गंदगी न फैलाएं। साथ ही, उनकी यह मासूम आवाज मंदिर की चौखट से निकलकर जिला प्रशासन और नगर पालिका के बंद कानों तक पहुंचे।
सफाई के नाम पर भ्रष्टाचार की गंगा: हर साल करोड़ों स्वाहा
यह एक कड़वा सच है कि हर साल सीवन नदी की सफाई और गहरीकरण के नाम पर शासन द्वारा लाखों-करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जाते हैं। बड़े-बड़े आयोजन होते हैं, जनसेवी संस्थाएं और प्रशासनिक अधिकारी फोटो खिंचवाते हैं, लेकिन परिणाम हमेशा ‘शून्य’ ही रहता है। सवाल यह उठता है कि आखिर हर साल वही सफाई और वही गहरीकरण की जरूरत क्यों पड़ती है? क्या सीवन नदी अब ‘भ्रष्टाचार की गंगा’ बन चुकी है, जिसमें प्रशासन और राजनेता हर साल डुबकी लगाते हैं और अगले साल के बजट का इंतजार करते हैं? एक बार में ठोस काम न होना व्यवस्था की नीयत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
इन ‘सीवन पुत्रों’ ने उठाई आवाज
गणेश जी को ज्ञापन सौंपने के दौरान नन्हे बच्चों के साथ सीवन पुत्र प्रदीप चावड़ा, कैलाश चव्हाण, मुकेश राय, प्रकाश यादव, नितेश जायसवाल, मनीष शर्मा, यश चावड़ा, विनोद यादव, विकास वंशकार और रितेश दोहरे सहित अनेक जागरूक नागरिक उपस्थित थे। इन सभी का एक ही संकल्प है कि सीवन नदी को केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर स्वच्छ और सुंदर बनाया जाए। अब देखना यह है कि बप्पा को सौंपी गई इन मासूमों की अर्जी क्या सोए हुए प्रशासन को जगा पाएगी।
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