जबलपुर धान घोटाला: उज्जैन के 5 मिलरों पर FIR दर्ज, ₹8 करोड़ से अधिक का धान बेचा

 नेता प्रतिपक्ष ने उच्च स्तरीय जाँच की माँग की

उज्जैन, अग्निपथ। मध्यप्रदेश के जबलपुर में आठ महीने पहले हुए करोड़ों रुपये के धान खरीदी घोटाले की आंच अब उज्जैन तक पहुंच गई है। इस मामले में जबलपुर कलेक्टर के निर्देश पर प्रदेश के 17 मिलरों, जिनमें उज्जैन के पाँच मिलर भी शामिल हैं, पर प्रकरण दर्ज किया गया है। इन मिलरों ने जबलपुर से धान उठाकर उसे उज्जैन लाने की बजाय वहीं बेच दिया और फर्जी बिलों के माध्यम से उज्जैन प्रशासन के साथ भी धोखाधड़ी की।

घोटाला प्रमाणित होने के बावजूद उज्जैन जिला प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न होने पर, नेता प्रतिपक्ष रवि रॉय ने मुख्य सचिव और कलेक्टर को फिर एक बार शिकायत कर आरोपियों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

फर्जीवाड़ा: कागजों पर 17 करोड़ का धान गायब

  • मूल घोटाला: यह फर्जीवाड़ा मार्च 2025 के दौरान जबलपुर में सामने आया था, जहाँ मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन के कर्मचारियों ने मिलरों और सोसाइटी की मिलीभगत से कागजों पर ₹30 करोड़ 16 लाख रुपये का धान खरीद लिया।

  • उज्जैन कनेक्शन: नेता प्रतिपक्ष रवि रॉय के अनुसार, उज्जैन के पाँच मिलर— श्रीकृष्णा राइस एंड पोहा इंडस्ट्रीज, श्रीराम एग्रो इंडस्ट्रीज, मे. शिप्रा इंटरप्राइजेज, रुकमणी राइस एवं पोहा इंडस्ट्रीज और मारुति ट्रेडर्स— पर आरोप है कि उन्होंने लगभग 37 हजार क्विंटल धान (जिसकी लागत 8 करोड़ 83 लाख 35 हजार रुपये है) को जबलपुर में ही बेच दिया।

  • फर्जी बिल: इन मिलरों को धान को चावल में बदलकर वापस जबलपुर भेजना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बावजूद, उन्होंने फर्जी परिवहन और अन्य बिल प्रस्तुत कर यह दर्शाया कि चावल उज्जैन से जबलपुर भेजा गया है, जबकि कुछ मिलरों के पास चावल बनाने की मशीन तक नहीं है। फर्जी बिलों के आधार पर इन्होंने शासन से करोड़ों रुपये अवैध तरीके से लिए।

उज्जैन प्रशासन पर सवाल

जबलपुर प्रशासन की कार्रवाई से यह प्रमाणित हो गया कि उज्जैन के मिलरों ने शासन के साथ बड़ी धोखाधड़ी की है, जिसमें सहकारिता और फूड कॉर्पोरेशन के अधिकारियों/कर्मचारियों की मिलीभगत भी प्रमाणित होती है। नेता प्रतिपक्ष रॉय का कहना है कि इतना बड़ा घोटाला होने के बावजूद उज्जैन जिला प्रशासन ने इन मिलरों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

जाँच समिति का अस्पष्ट रुख

तत्कालीन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने शिकायत के बाद जाँच के निर्देश दिए थे। जाँच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चावल का स्रोत स्पष्ट किया जाना संभव नहीं है और मिलरों के बयान विश्वसनीय नहीं हैं। हालांकि, कमेटी ने मिलरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए स्पष्ट अभिमत नहीं दिया। नेता प्रतिपक्ष रॉय ने मुख्य सचिव और कलेक्टर उज्जैन से इस मामले में उच्च स्तरीय जांच करने का आग्रह किया है।

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