तीन विभागों से धोखा, एफआईआर के लिए एक भी राजी नहीं

उज्जैन, अग्निपथ। ऋषिनगर पेट्रोल पंप के पास वाले प्लॉट पर फर्जी नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र के जरिए बहुमंजिला इमारत का निर्माण शुरू करने के मामले के पूरी तरह से खुल जाने के बाद सरकारी अधिकारी भी केवल बिल्डिंग परमिशन निरस्त कर चुप बैठ गए हैं। राजस्व, नगर निगम और ग्राम तथा नगर निवेश विभाग के स्तर पर इस मामले को दबाने की कोशिशें शुरू हो गई है। तीनों में किसी भी विभाग के अधिकारी फर्जीवाड़े की एफआईआर तक दर्ज कराने को तैयार नहीं है।

विक्रमादित्य क्लाथ मार्केट निवासी महेश पलोड़ द्वारा नानाखेड़ा तहसील की सर्वे क्रमांक 58/2 की 2971.90 वर्गमीटर जमींन पर विकास और भवन अनुज्ञा प्राप्त करने के लिए नजूल का अनापत्ति प्रमाण पत्र नगर निगम में अन्य दस्तावेजों के साथ जमा कराया था। नगर निगम से प्रकरण ग्राम तथा नगर निवेश विभाग में ट्रांसफर हुआ। इसी अनापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर ग्राम तथा नगर निवेश विभाग ने 19 फरवरी 2020 को बिल्डिंग ले-आउट की स्वीकृति जारी की थी। एक शिकायत के बाद मामले की जांच हुई तो नजूल ने यह स्वीकार कर लिया कि परमिशन की फाइल के साथ लगा नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र फर्जी है। नजूल से ऐसा कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी ही नहीं हुआ था।

राजस्व रिकार्ड में सर्वे नंबर 58/2 की जमीन आबादी गांवठान शासकीय के रूप में दर्ज है। इस मामले में तीनों ही विभागों के साथ धोखा हुआ। सरकारी गांवठान आबादी की जमीन को फर्जी तौर पर निजी बताया गया। इसी जमीन पर फर्जी नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र नगर निगम में लगाया गया। इसी फर्जी पत्र के आधार पर ग्राम तथा नगर निवेश विभाग से ले-आउट स्वीकृत कराया गया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ही नगर निगम ने सरकारी जमीन पर बहुमंजिला इमारत बनाने की अनुमति जारी कर दी।
प्रकरण की शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया कि मामले में सरकारी जमीन पर न केवल कब्जे की साजिश रची गई बल्कि कब्जे के लिए जाली सरकारी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। हद यह है कि पूरा प्रकरण खुल जाने के बाद भी नजूल विभाग केवल एक पत्र जारी कर स्पष्टीकरण कर चुका है।

ग्राम तथा नगर निवेश विभाग और नगर निगम ने फर्जी एनओसी को आधार बनाकर परमिशन निरस्त कर दी लेकिन स्पष्ट धोखाधड़ी के बावजूद भी तीनों में किसी भी विभाग के अधिकारी ने मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए कोई पत्राचार नहीं किया।

इनका कहना

यह बात सही है कि फर्जी दस्तावेजों से अनुमति लेने के मामले में धोखाधड़ी का प्रकरण बनता है। एफआईआर दर्ज करवाने पर विचार कर रहे है। – सी.के. साधव, संयुक्त संचालक ग्राम तथा नगर निवेश

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