धार, अग्निपथ। आदिवासी अंचल के सबसे बड़े लोक उत्सव ‘भगोरिया’ की रंगत रविवार को धार के दशहरा मैदान में देखते ही बनी। जनजाति विकास मंच द्वारा चौथी बार आयोजित इस ‘आदर्श भगोरिया हाट’ में आस्था, परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिला। पूरा शहर मांदल की थाप और बांसुरी की मधुर तान के बीच आदिवासी संस्कृति के सतरंगी रंगों में सराबोर नजर आया।
हाट में धार के आसपास के लगभग 100 से अधिक ग्रामों और फलियों से ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर पहुंचे। जहाँ एक ओर बुजुर्ग और महिलाएं अपनी मूल संस्कृति को दर्शाते परिधानों में थे, वहीं युवाओं में आधुनिकता का क्रेज भी दिखा। कई युवक-युवती जींस, शर्ट, चश्मा और डिजाइनर लहंगों के साथ एक ही ‘ड्रेस कोड’ में नजर आए। करीब 150 ढोल-मांदल दलों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया, जिससे हर कोई झूमने पर मजबूर हो गया।
सम्मान और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
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भगोरिया के उत्साह को देखते हुए शहर में आठ अलग-अलग मंच बनाए गए थे, जहाँ से मांदल दलों का भव्य स्वागत और सम्मान किया गया। इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने के लिए लोग मोबाइल से सेल्फी और वीडियो लेते नजर आए। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा और असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रखी गई।
जागरूकता का संदेश: नशे और साइबर ठगी के खिलाफ मुहिम
दोपहर 3 बजे जब भगोरिया अपने पूरे शबाब पर था, तब जनजातीय विकास मंच, नगर पालिका और पुलिस विभाग द्वारा लगाए गए मंचों से सामाजिक संदेश भी दिए गए। समाजजनों को नशामुक्ति, यातायात नियमों के पालन और विशेषकर साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूक किया गया।
आयोजन में इनकी रही मुख्य भूमिका
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में जनजाति विकास मंच के जिलाध्यक्ष अरविंद डावर, जिला युवा प्रमुख प्रकाश सोलंकी, मीडिया प्रभारी लक्ष्मण पटेल, चंदू वसुनियां, कीर्तिमान पटेल, लोकेश मंडलोई, रवि कटारे और दिलीप पिछड़वाल सहित अनेक कार्यकर्ताओं का सराहनीय योगदान रहा। कार्यकर्ताओं ने पिछले एक सप्ताह से गांव-गांव जाकर लोगों को इस उत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।
