किसानों और व्यापारियों के लाखों रुपये गायब
धार, अग्निपथ। धार जिले में इन दिनों साइबर अपराधियों ने आतंक मचा रखा है, जिससे बैंक खाताधारकों की रातों की नींद उड़ गई है। पिछले मात्र दो दिनों के भीतर धोखाधड़ी के चार बड़े मामले सामने आए हैं, जिनमें ठगों ने बड़ी ही चालाकी से लाखों रुपये साफ कर दिए। चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ मामलों में बिना किसी कॉल या ओटीपी के ही खाते खाली हो गए, तो कहीं व्हाट्सएप हैक कर वारदात को अंजाम दिया गया।
कैसे लुटी लोगों की गाढ़ी कमाई?
केस 1: केवाईसी लिंक ने किया कंगाल (धार शहर) लक्की चौराहा निवासी एक व्यक्ति को 29 जनवरी को अज्ञात नंबर से केवाईसी अपडेट करने की लिंक मिली। लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल और व्हाट्सएप हैक हो गया। जब 1 फरवरी को खाता चेक किया, तो होश उड़ गए। खाते से 3 लाख 82 हजार 600 रुपये गायब थे और मात्र 212 रुपये शेष बचे थे। पुलिस ने पश्चिम बंगाल के आरोपी जयंतालाल रबिदास सहित अन्य पर जीरो पर मामला दर्ज किया है।
केस 2: राजगढ़ में 1 लाख की चपत जोधपुर निवासी और वर्तमान में राजगढ़ की राजेंद्र कॉलोनी में रह रहे श्रवण बंजारा के खाते से अज्ञात ठगों ने 1 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर निकाल लिए। राजगढ़ पुलिस ने धारा 420 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
केस 3: मोबाइल हैक कर उड़ाए 2.81 लाख (धामनोद) धामनोद के सुन्द्रेल फाटा निवासी राहुल पाटीदार का मोबाइल संभवत: हैक कर लिया गया। उनके आईडीएफसी बैंक खाते से तीन किश्तों में कुल 2.81 लाख रुपये कोटक महिंद्रा बैंक के किसी अज्ञात खाते में ट्रांसफर कर दिए गए। राहुल को इसकी भनक तब लगी जब पैसे पूरी तरह कट चुके थे।
केस 4: अनारद में 2 लाख की ठगी धार शहर के समीप ग्राम अनारद निवासी इरफान खान के साथ भी इसी तरह की घटना हुई। अज्ञात ठगों ने फर्जी तरीके से उनके बैंक खाते से 2 लाख रुपये निकाल लिए। इरफान की शिकायत पर पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है।
ठगी का नया पैटर्न: व्हाट्सएप और रिमोट एक्सेस
- साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठग अब पुराने तरीकों के बजाय लिंक फिशिंग और रिमोट एक्सेस का सहारा ले रहे हैं।
- फर्जी लिंक: बैंक के नाम से केवाईसी अपडेट करने के बहाने लिंक भेजकर मोबाइल का पूरा कंट्रोल ले लेना।
- व्हाट्सएप हैकिंग: संदिग्ध लिंक के जरिए व्हाट्सएप हैक करना और वित्तीय जानकारी चुराना।
- मालवेयर: मोबाइल में मालवेयर इंस्टॉल कर बिना यूजर की अनुमति के बैंकिंग ट्रांजेक्शन को अंजाम देना।
जांच की धीमी रफ्तार और बाहरी कनेक्शन
हालांकि पुलिस ने सभी मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर ली है, लेकिन अभी तक राशि की रिकवरी या किसी बड़ी गिरफ्तारी में सफलता नहीं मिली है। इन वारदातों के तार पश्चिम बंगाल जैसे बाहरी राज्यों से जुड़े होने के कारण जांच की गति धीमी बनी हुई है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें और न ही अपना मोबाइल किसी अनजान व्यक्ति को दें।
