उज्जैन, अग्निपथ। शिप्रा किनारे बनाए जा रहे 29.21 किमी लंबे नए घाटों के नामकरण की तैयारी चल रही है। जहाँ-जहाँ घाट बन रहे हैं, उस क्षेत्र के महत्व व पौराणिकता के आधार पर घाटों के नाम रखे जाएँगे। इसके लिए धार्मिक और धर्मस्व विभाग की टीम ज़रूरी जानकारी जुटाने में लगी हुई है।
हालाँकि, शिप्रा किनारे के नए घाटों के नामकरण कीतैयारी में जुटे अधिकारियों को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि 21 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यह स्पष्ट कर चुके हैं कि सिंहस्थ में हर घाट रामघाट होगा। उन्होंने यह बात जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत रामघाट पर श्रमदान करते हुए कही थी।
सिंहस्थ की तैयारियों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा था कि शनि मंदिर से रामघाट, गऊघाट से लालपुर, और मंगलनाथ से रामघाट तक श्रद्धालु नौकायन से आवागमन कर सकेंगे। 29 किमी के नए घाट बनेंगे। शिप्रा का हर घाट रामघाट होगा। यानी श्रद्धालु कहीं भी स्नान करेंगे तो उन्हें उतना ही पुण्य मिलेगा।
इन तमाम परिस्थितियों के बीच कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान सभी घाट रामघाट ही रहेंगे, लेकिन बाकी समय के लिए नए घाटों की पहचान पौराणिक महत्व के आधार पर हो, इसलिए नामकरण भी ज़रूरी है।
जल्द ही घाटों के नाम सामने आएँगे: सिंहस्थ 2028 में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। चूँकि इस मेले में सर्वाधिक महत्व शिप्रा स्नान का रहता है, ऐसे में शासन स्नान की सुविधाओं में विस्तार के लिए शिप्रा किनारे 29.21 किमी के नए घाटों का निर्माण करवा रहा है, जबकि शिप्रा किनारे करीब 7-8 किमी में पुराने घाट बने हुए हैं, जो कि प्राचीन नामों से जाने जाते हैं।
नए घाटों की भी अपनी पहचान व इनके नाम हों, इसके लिए सिंहस्थ मेला कार्यालय ने नामकरण की तैयारी शुरू करवाई है। इसका जिम्मा धार्मिक व धर्मस्व विभाग को दिया है, जो कि इन घाटों के क्षेत्रों के महत्व व वहाँ की पौराणिक स्थिति से जुड़ी जानकारी जुटा रहा है, ताकि क्षेत्र की पहचान, महत्व व पौराणिकता के आधार पर ही घाटों का नाम रखा जा सके। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही घाटों के नामों की ये श्रृंखला सामने आएगी।
कौन कौन से घाट
शनि मंदिर त्रिवेणी घाट, गऊघाट, नृसिंह घाट, भूखी माता घाट, दत्त अखाड़ा, रामघाट, छोटी रपट घाट, संत रविदास घाट, चक्रतीर्थ घाट, मौनी तीर्थ घाट, मंगलनाथ घाट, सिद्धवट घाट आदि।
रामघाट पर स्नान की हर श्रद्धालु की मंशा
गौरतलब है कि सिंहस्थ में श्रद्धालु शिप्रा के रामघाट पर स्नान करने के इच्छुक रहते हैं, जबकि भीड़ प्रबंधन की दृष्टि से ये संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में पिछले 2016 के सिंहस्थ में शिप्रा के हर घाट पर रामघाट की पट्टिका चस्पा करवाई गई थी। चूँकि इस बार रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, तो तैयारियों में इस बिंदु पर गंभीरता बरती जा रही है।
नए घाटों पर यह सुविधा भी हाथोंहाथ करवाई जा रही है
नए घाटों के निर्माण के लिए सरकार ने 778.91 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी थी। इंदौर की फलौदी कंस्ट्रक्शन इप्रालि से प्रोजेक्ट को पूरा करने का अनुबंध 563 करोड़ में हुआ है। वर्तमान में नए घाट निर्माण का कार्य लोअर और अपर स्टेज पर है। इन नए घाटों पर प्रकाश व्यवस्था, चेंजिंग रूम, वॉच टावर, सूचना के लिए लाउड स्पीकर, आने-जाने के मार्ग की कनेक्टिविटी की सुविधा भी हाथोंहाथ करने की प्लानिंग है।
इनका कहना
नए घाटों के नामकरण के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। क्षेत्र के महत्व व पौराणिक पहचान के आधार पर नामकरण के लिए जानकारी जुटाई जा रही है।
– आशीष कुमार सिंह, सिंहस्थ मेला अधिकारी
