उज्जैन, अग्निपथ। नगर निगम जोन क्रमांक 2 के अंतर्गत आने वाले निगम परिसर क्षेत्र में भू-माफियाओं और असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं। 7 फरवरी को जिस जमीन को भारी पुलिस बल और 4 जेसीबी की मदद से अतिक्रमण मुक्त कराया गया था, उसी जगह पर रविवार और सोमवार को दोबारा कब्जा करने की कोशिश की गई। सूचना मिलते ही निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया।
दो करोड़ की सरकारी जमीन पर फिर तनी दीवारें
गौरतलब है कि विगत 7 फरवरी को नगर निगम ने स्विमिंग पूल और पंच पीर मजार के समीप करीब 6 हजार स्क्वायर फीट भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाया था। इस जमीन की कीमत 2 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। तब कार्रवाई के दौरान टीन शेड और बाउंड्रीवॉल गिराकर भूमि का समतलीकरण किया गया था। लेकिन बीते दो दिनों से अज्ञात लोगों द्वारा यहाँ फिर से सीमेंट-कंक्रीट का पक्का निर्माण और बाउंड्रीवॉल बनाने का प्रयास किया गया। निर्माण कार्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया।
अधीक्षक यंत्री ने रुकवाया निर्माण, समतलीकरण के निर्देश
अतिक्रमण की खबर मिलते ही निगम के अधीक्षक यंत्री संतोष गुप्ता दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों को निर्देश देकर तत्काल अवैध निर्माण को हटवाया। गुप्ता ने अपने अधीनस्थों को सख्त लहजे में कहा कि भूमि का दोबारा समतलीकरण किया जाए और वहां निगम की मिल्कियत का बोर्ड लगाया जाए। बताया जा रहा है कि यहाँ पक्का निर्माण कर अवैध गतिविधियों को अंजाम देने की योजना थी।
असामाजिक तत्वों का जमावड़ा और कोतवाली पुलिस की लापरवाही
निगम परिसर के पीछे का हिस्सा जंगली झाड़ियों और सुनसान होने के कारण असामाजिक तत्वों और पारदियों का अड्डा बना हुआ है। यहाँ जुआ, सट्टा और अन्य अवैध कारोबार धड़ल्ले से चलते हैं। हाल ही में निगम के काम से आई एक वृद्ध महिला को इन्ही झाड़ियों में ले जाकर उसके कान की बाली छीन ली गई थी।
विगत दिनों निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा के निर्देश पर पारदियों के डेरे हटाए गए थे, लेकिन कोतवाली पुलिस की गश्त न होने के कारण यहाँ दोबारा असामाजिक तत्व सक्रिय हो गए हैं। यदि पुलिस यहाँ नियमित गश्त करे, तो इन वारदातों और बार-बार होने वाले अतिक्रमण पर स्थायी रोक लग सकती है।
