नगर निगम में असली जिम्मेदार ‘साहब’ बचे, सहायक यंत्री नपे

नगर निगम विशेष सम्मेलन

उज्जैन, अग्निपथ। नगर पालिक निगम उज्जैन में इन दिनों दंड और पुरस्कार की व्यवस्था को लेकर गलियारों में तीखी चर्चाएं गर्म हैं। मामला गॉड बस्ती में पेयजल पाइप लाइन के रखरखाव में बरती गई लापरवाही से जुड़ा है। जहाँ एक ओर निगम आयुक्त ने स्वच्छता और सुचारू पेयजल व्यवस्था में कोताही बरतने पर सहायक यंत्री को निलंबित कर विभागीय जांच बिठा दी है, वहीं दूसरी ओर उस क्षेत्र के वास्तविक जिम्मेदार उपयंत्री (सब-इंजीनियर) पर निगम प्रशासन की ‘मेहरबानी’ चर्चा का विषय बनी हुई है।

निरीक्षण में खुली पोल: सड़कों पर बह रहा था गंदा पानी

दरअसल, पूरा मामला 5 फरवरी से शुरू हुआ जब नगर निगम आयुक्त ने उज्जैन सीमा अंतर्गत आने वाली गॉड बस्ती का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान व्यवस्थाओं की जो तस्वीर सामने आई, वह बेहद चिंताजनक थी। निरीक्षण में पाया गया कि क्षेत्र में अधिकांश स्थानों पर पेयजल पाइप लाइन पूरी तरह टूटी-फूटी अवस्था में थी। पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण उसमें नालियों का गंदा पानी मिल रहा था, जिससे क्षेत्रवासियों को दूषित जल की आपूर्ति हो रही थी।

इतना ही नहीं, पाइप लाइनों से हो रहे रिसाव के कारण सड़कों पर अनावश्यक पानी बह रहा था, जिससे पूरी बस्ती में गंदगी और अव्यवस्था का माहौल निर्मित हो गया था। शुद्ध पेयजल का इस तरह दुरुपयोग होना और जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होने पर आयुक्त ने सख्त नाराजगी जाहिर की थी।

सहायक यंत्री निलंबित, एक माह में मांगी रिपोर्ट

इस गंभीर लापरवाही के लिए प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी संधारण खंड के प्रभारी सहायक यंत्री दिलीप नौधाने को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निगम प्रशासन ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए विभागीय जांच भी शुरू कर दी है।

जांच के लिए उपायुक्त योगेंद्र सिंह पटेल को जांच अधिकारी और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी संधारण खंड के सहायक यंत्री शिवम दुबे को प्रकरण प्रस्तुतकर्ता नियुक्त किया गया है। आदेश के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की जांच एक माह की समय सीमा में पूर्ण कर अनिवार्य रूप से रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

भेदभाव के आरोप: क्षेत्र के उपयंत्री पर निगम क्यों मेहरबान?

निगम के भीतर इस कार्रवाई को लेकर अब सुगबुगाहट तेज हो गई है। कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच यह सवाल तैर रहा है कि जिस उपयंत्री आशीष जाधव के प्रत्यक्ष प्रभार में यह क्षेत्र आता है, उन पर गाज क्यों नहीं गिरी? बताया जा रहा है कि निरीक्षण के दौरान श्री जाधव मौके पर उपस्थित नहीं थे, जिसका उन्हें ‘फायदा’ मिल गया।

निगम गलियारों में चर्चा है कि जमीनी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करना उपयंत्री की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, लेकिन कार्रवाई केवल उच्च पदस्थ अधिकारी पर की गई। वहीं, श्री नौधाने के निलंबन के बाद अब तक उनका कार्यभार किसी अन्य अधिकारी को नहीं सौंपा गया है, जिससे संभाग के कार्यों पर भी असर पड़ने की संभावना है।

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