धार, अग्निपथ। धार नगर पालिका की कार्यप्रणाली और शहर की लगातार बिगड़ती स्थिति को लेकर अब जनप्रतिनिधियों का सब्र जवाब देने लगा है। पार्षद प्रतिनिधि अजय डॉ. मनोहर सिंह ठाकुर ने नगर पालिका और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि शहर की सरकार वर्तमान में भगवान भरोसे चल रही है। कांग्रेस नेता ठाकुर ने सोशल मीडिया पर अधिकारियों को भेजे गए संदेशों के स्क्रीनशॉट भी सार्वजनिक किए हैं, जिनमें वे जनमुद्दों को लेकर अधिकारियों से मिलने का समय मांग रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई सकारात्मक उत्तर नहीं मिल रहा है।
कार्यालय से नदारद रहते हैं जिम्मेदार अधिकारी
अजय ठाकुर ने रोष प्रकट करते हुए बताया कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी और वार्ड प्रभारी इंजीनियरों के पास जनप्रतिनिधियों की समस्याओं को सुनने का समय तक नहीं है। अधिकारी न तो कार्यालय में मिलते हैं और न ही फोन उठाते हैं। छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए भी एस्टीमेट तैयार नहीं किए जा रहे हैं, जिसके कारण शहर के विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगर पालिका कार्यालय में हुई डस्टबिन, वाहनों के पार्ट्स और जेसीबी के बकेट चोरी होने जैसी घटनाओं पर अधिकारियों ने जानबूझकर केस दर्ज नहीं कराया, जो उनकी मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
भ्रष्टाचार की आशंका और सूचना का अधिकार
नगर पालिका में पारदर्शिता के अभाव पर सवाल उठाते हुए ठाकुर ने कहा कि सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियों में भी टालमटोल की जा रही है, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका और अधिक गहरा गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सीएमओ साहब ठेकेदारों के कार्यक्रमों में वीडियो बनवाने में व्यस्त रहते हैं, लेकिन आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए उनके पास समय का अभाव है। यह स्थिति अधिकारियों के ठेकेदारों के प्रति मोह और जनता के प्रति घोर लापरवाही को प्रदर्शित करती है।
प्रशासन को चेतावनी: जल्द सुधारें व्यवस्था
ठाकुर ने जिला कलेक्टर की कार्यशैली पर भी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि जल समस्या जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रमाण सहित ज्ञापन देने के बावजूद जिला प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। विधानसभा में उठने वाले मुद्दों को भी अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। अजय ठाकुर ने कलेक्टर से मांग की है कि इस लापरवाह कार्यप्रणाली पर तुरंत अंकुश लगाया जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम नहीं कसी गई, तो जनप्रतिनिधि और जनता मिलकर सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
