पंडित सूर्यनारायण व्यास केवल ज्योतिषाचार्य ही नहीं, राष्ट्र के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पुरोधा थे : डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला

उज्जैन, अग्निपथ। पंडित सूर्यनारायण व्यास केवल एक बड़े ज्योतिषाचार्य ही नहीं, बल्कि कुशल पत्रकार, व्यंग्यकार, संपादक, क्रांतिकारी और इतिहासकार भी थे। भारत के सांस्कृतिक गौरव की पुनर्स्थापना में उनका योगदान अभूतपूर्व है। यह विचार प्रेमचंद सृजन पीठ द्वारा विक्रमादित्य शोध पीठ में आयोजित व्याख्यान ‘सुमिरन’ में व्यक्त किए गए।

पद्मभूषण पंडित सूर्यनारायण व्यास की जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम में सारस्वत अतिथि के रूप में प्रसिद्ध वैदिक विद्वान डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने अपने उद्बोधन दिए। उन्होंने कहा कि पंडित व्यास समय के बड़े पाबंद थे और उनका जीवन सहज, सरल और बेहद आत्मीय था। उज्जैन में कई विद्यालय, शैक्षिक भवन और विक्रम विश्वविद्यालय जैसी संस्थाएं शहर को उनकी अनुपम देन हैं।

हिंदी पत्रकारिता को दिए नए तेवर और पहचान

विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ. शैलेंद्रकुमार शर्मा ने कहा कि नगर, अंचल और राष्ट्र के पुनर्जागरण और सांस्कृतिक अभ्युदय की दिशा में पंडित सूर्यनारायण व्यास का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को नए तेवर, नई भाषा और नए औजारों से लैस किया।

उनके यहाँ राजनीति, साहित्य, संस्कृति और पत्रकारिता के बीच की भेदक रेखाएं समाप्त हो गई थीं। दशकों पहले हिंदी पत्रकारिता के खास स्वभाव को गढ़ने से लेकर राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उसकी अलग पहचान निर्धारित करवाने में पंडित व्यास और उनके ‘विक्रम’ की विशिष्ट भूमिका रही है। व्यास का भारती भवन सिर्फ भवन नहीं, माँ भारती का भवन है जहाँ ज्योतिष, खगोल, इतिहास और संस्कृति का वास है।

ज्योतिष जगत के सूर्य और भविष्यवाणियों के सिद्ध पुरुष

विशिष्ट अतिथि मुद्राशास्त्री आर.सी. ठाकुर ने पंडित व्यास के निडर और स्वाभिमानी होने के कई रोचक संस्मरण सुनाए। अध्यक्षीय उद्बोधन में दूरदर्शन के पूर्व अपर महानिदेशक राजशेखर व्यास ने कहा कि पंडित व्यास ज्योतिष जगत के सूर्य थे और समाचार पत्र ‘विक्रम’ में लिखे उनके संपादकीय आज भी वैचारिक दृष्टि से धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पंडित व्यास के कई अधूरे स्वप्नों को पूरा करने में जुटे हैं। उनकी असंख्य भविष्यवाणियाँ सत्य सिद्ध हुईं। कवि कालिदास और सम्राट विक्रमादित्य से सभी को परिचित कराने में उनका अहम योगदान है।

गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति

अतिथि स्वागत प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक मुकेश जोशी और विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक डॉ. रमण सोलंकी ने किया। आयोजन में डॉ. शिव चौरसिया, डॉ. जगदीश शर्मा, सतीश दवे, श्रीराम दवे, अशोक भाटी, शशांक दुबे, संतोष सुपेकर, डॉ. प्रीति पांडे, डॉ. पांखुरी वक्त, दिव्या सक्सेना, अजय शर्मा, डॉ. विवेक चौरसिया, प्रदीप व्यास और सीमा देवेंद्र सहित कई गणमान्य जन उपस्थित थे। संचालन वरिष्ठ कवि दिनेश दिग्गज ने किया और आभार डॉ. हरीशकुमार सिंह ने माना।

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