धार, अग्निपथ। सरकार की तमाम सख्ती और भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों के बावजूद सरकारी तंत्र में रिश्वतखोरी की जड़ें गहरी जमी हुई हैं। ताजा मामला धार जिले से सामने आया है, जहां मंगलवार को इंदौर लोकायुक्त की टीम ने जल संसाधन विभाग के एक बाबू को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी बाबू ने एक किसान से तालाब की जमीन पर खेती के लिए पट्टा स्वीकृत कराने के एवज में मोटी रकम की मांग की थी।
प्रकाश नगर में बिछाया गया जाल
ग्राम आमला निवासी 36 वर्षीय आवेदक दयाराम पटेल ने लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय से शिकायत की थी। दयाराम ने बताया कि वह तालाब की रिक्त भूमि पर खेती के लिए पट्टा चाहता था। इसके लिए उसने जल संसाधन विभाग में कार्यरत अमीन राज दिनकर से संपर्क किया। पट्टे की सरकारी फीस मात्र 5 हजार से 7 हजार रुपये होती है, लेकिन आरोपी अमीन राज दिनकर ने पट्टा दिलाने के नाम पर 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। आवेदक यह अनैतिक राशि नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने लोकायुक्त की शरण ली।
घर पर रिश्वत लेते धराया आरोपी
शिकायत की पुष्टि होने के बाद 31 मार्च 2026 को लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाया। चूंकि आज कार्यालय का अवकाश था, इसलिए आरोपी ने रिश्वत की राशि लेने के लिए आवेदक को धार स्थित प्रकाश नगर में अपने किराए के मकान पर बुलाया। जैसे ही दयाराम ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये आरोपी बाबू के हाथ में थमाए, आसपास तैनात लोकायुक्त दल ने उसे धर दबोचा। आरोपी के हाथ धुलवाते ही वे गुलाबी हो गए, जो रिश्वत लेने का पुख्ता प्रमाण है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई उप पुलिस अधीक्षक सुनील तालान के नेतृत्व में अंजाम दी गई। टीम में आरक्षक विजय कुमार, आदित्य सिंह, कमलेश परिहार, अनिल और रामेश्वर शामिल थे। लोकायुक्त ने आरोपी राज दिनकर के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया है। विभाग अब आरोपी के पुराने रिकॉर्ड और संपत्ति की भी जांच कर सकता है ताकि भ्रष्टाचार के अन्य मामलों का खुलासा हो सके।\
