शाजापुर, अग्निपथ। भोर की पहली किरण के साथ ही जब जैन मंत्रों की पावन गूंज उठी और तीन लोक के नाथ श्री आदिनाथ परमात्मा भव्य पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा के बीच निकले, तो पूरा शाजापुर शहर मानो जिनशासन के रंग में रंग गया। हर आंख अपने आराध्य के दर्शन को आतुर थी और हर जुबान पर दादा आदिनाथ के जयकारे थे। अवसर था जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर दादा आदिनाथ परमात्मा के जन्म कल्याणक महोत्सव का, जिसे बुधवार को पूरे शहर में अपार श्रद्धा, भक्ति और अभूतपूर्व उत्साह के साथ मनाया गया।
अखिल भारतीय जैन श्वेतांबर युवक महासंघ के राष्ट्रव्यापी आह्वान और परम उपकारी आचार्य भगवंत श्रीमद्विजय वीररत्न सूरीश्वरजी महाराज की निश्रा में नगर के चौबीस जिनालय धाम (ओसवाल सेरी) और श्री सिद्धाचल वीरमणि महातीर्थ धाम (लालघाटी) पर दिनभर धार्मिक और सामाजिक आयोजनों का तांता लगा रहा।
अलौकिक मंत्रोच्चार और भव्य पालकी यात्रा
महोत्सव का सूर्योदय श्री सिद्धाचल वीरमणि तीर्थ धाम पर जैन मंत्रास परिवार द्वारा सुबह 7:30 बजे किए गए प्राचीन मंत्रोच्चार के साथ हुआ। यहाँ दादा आदिनाथ का अलौकिक शक्रस्तव अभिषेक किया गया। वहीं, चौबीस जिनालय धाम में भगवान का पक्षाल और शांति स्नात्र पूजा भक्तिभाव से संपन्न हुई। ठीक 9 बजे चौबीस जिनालय से परमात्मा की शाही पालकी यात्रा गाजे-बाजे के साथ शुरू हुई। यह यात्रा शहर के आजाद चौक, नई सड़क, पीपली गली और कसेरा बाजार से होते हुए गुजरी। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने प्रभु का स्वागत किया। ओसवाल सेरी में आरती का सौभाग्य पारस जैन (भरड़ वाला परिवार) तथा वीरमणि तीर्थ पर ऋषिकुमार व अजय जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
अनोखी छटा, नयनाभिराम श्रृंगार और दीप सज्जा
शाम ढलते ही लालघाटी स्थित श्री सिद्धाचल वीरमणि तीर्थ धाम रोशनी से नहा उठा। शाम 7 बजे परमात्मा की प्रतिमा का ऐसा नयनाभिराम और आकर्षक श्रृंगार (अंगीरचना) किया गया कि भक्त बस निहारते ही रह गए। मनमोहक दीप सज्जा के बीच सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में भगवान की महाआरती कर धर्मलाभ लिया।
तपस्वी रत्नों का हुआ महा-सम्मान
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जैन युवक महासंघ ने अपनी श्रेष्ठ परंपरा को निभाते हुए तपस्वियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। जिलाध्यक्ष मंगल नाहर के नेतृत्व में नगर के तपस्वी रत्नों का भव्य बहुमान किया गया। कठोर उपधान तप पूर्ण करने वाले बाल तपस्वी गुणित दुग्गड़ और श्री शत्रुंजय पालीताणा की सात यात्राएं करने वाले युवक महासंघ के जिला कोषाध्यक्ष प्रांजल मांडलिक को साफा पहनाकर, माला पहनाकर और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
धर्म के साथ कर्म, निराश्रितों को कराया भोजन
जैन समाज ने सिर्फ मंदिरों में ही नहीं, बल्कि सेवा के क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जैन युवक महासंघ के सदस्यों ने नाग-नागिनी रोड स्थित अखंड आश्रम पहुंचकर निराश्रितजनों को सम्मानपूर्वक भोजन कराया और इंसानियत की एक शानदार मिसाल पेश की। इस पूरे महा-आयोजन में समाज के सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
