पीएचसी ताजपुर: वेतन आहरण के नाम पर डॉक्टर से रिश्वत

निलंबित, suspend, निलंबन

संगणक का झारड़ा तबादला

ताजपुर, अग्निपथ। पीएचसी ताजपुर में पदस्थ संगणक (अकाउंटेंट) मंजूश्री मारफतिया द्वारा वेतन आहरण और अवकाश स्वीकृत कराने के नाम पर एक डॉक्टर से रिश्वत मांगने का गंभीर मामला सामने आया है। अकाउंटेंट ने फोन पे के माध्यम से रिश्वत की राशि लेने के बाद भी काम नहीं किया, जिसके बाद पीड़ित डॉक्टर ने कलेक्टर, सीएमएचओ और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। मामले की जांच में दोषी पाए जाने पर सीएमएचओ ने आरोपी संगणक का तबादला झारड़ा कर दिया है।

यह घटना पीएचसी ताजपुर के मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर कल्पेश दाहिमा के साथ घटी। कलेक्टर को दिए आवेदन में डॉ. दाहिमा ने बताया कि संगणक मंजू श्री मारफतिया ने उनका चार दिन का अवकाश पास कराने और वेतन निकलवाने के बहाने उन्हें नानाखेड़ा उज्जैन बुलाया था।

वहां मारफतिया ने दावा किया कि सीएमएचओ ऑफिस की बाबू अर्चना जॉर्ज और सुमित बाबू से उसकी ‘सेटिंग’ है और वह उनसे बोलकर काम करा देगी। इस काम के बदले उसने 3,000 रुपये की मांग की। डॉ. दाहिमा ने नकद राशि न होने पर 12 अक्टूबर 2025 को फोन पे के जरिए 2,000 रुपये का भुगतान किया और शेष 1,000 रुपये बाद में देने की बात कही।

दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जब काम नहीं हुआ और डॉक्टर ने पैसे वापस मांगे, तो संगणक ने टालमटोल शुरू कर दी। अंततः 9 दिसंबर 2025 को बीएमओ ताजपुर के सामने हुई आमने-सामने की चर्चा और दबाव के बाद अकाउंटेंट ने 2,000 रुपये वापस लौटाए।

वेतन रोकने की धमकी देकर वसूली का आरोप

डॉ. दाहिमा ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि संगणक मंजू श्री मारफतिया कर्मचारियों और अधिकारियों को वेतन रोकने की धमकी देकर अवैध वसूली करती है। यदि किसी कर्मचारी का अवकाश स्वीकृत हो भी जाता है, तो वह अटेंडेंस में उसे अस्वीकृत लिखकर वेतन रुकवा देती थी। वहीं, जिन कर्मचारियों से सांठगांठ हो जाती, उनके अर्जित अवकाश (ईएल) को मातृत्व अवकाश में बदलकर वेतन निकलवा दिया जाता था। पूर्व में भी एक स्टाफ नर्स के 18 महीने से अनुपस्थित रहने के बावजूद उसे मातृत्व अवकाश दिखाकर वेतन निकालने का मामला सामने आया है, जिसकी जांच जारी है। इसके अतिरिक्त, एक अन्य नर्स से मातृत्व अवकाश के नाम पर 8,000 रुपये मांगने की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है।

जांच में पुष्टि के बाद कार्रवाई

शिकायत मिलने पर बीएमओ ताजपुर ने चार सदस्यीय टीम का गठन किया था, जिसमें एमओ डॉ. आदित्यराजसिंह झाला, डॉ. अभिनव तिवारी, डॉ. खुशबू जाटवा और बीपीएम बलराज उज्जैनी शामिल थे। जांच समिति ने आरोपों को सही पाया, जिसके बाद सीएमएचओ द्वारा संगणक का तबादला कर दिया गया।

इनका कहना

मंजू मारफतिया की शिकायत मुझे प्राप्त हुई थी। जांच के बाद उनका तबादला झारड़ा कर दिया गया है। – डॉ. अशोक पटेल, सीएमएचओ

डॉ. कल्पेश दाहिमा के अनुसार, संगणक की इस कार्यप्रणाली से पूरा पीएचसी स्टाफ परेशान था और बिना पैसे लिए वह कोई भी कार्य नहीं करती थी।

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