धार, अग्निपथ। जिले में पराली जलाने की घटनाएं प्रशासनिक कार्रवाई और भारी जुर्माने के बावजूद थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हालांकि इस बार जागरूकता के चलते अधिकांश किसानों ने पराली जलाने से तौबा की है और खेतों में पलावा (सिंचाई) चलाने को प्राथमिकता दी है, लेकिन अब भी कुछ क्षेत्रों में रात के अंधेरे में पराली जलाई जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा जिले में अब तक करीब एक हजार से अधिक ऐसी घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें किसानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
सेटेलाइट से निगरानी और मौके पर कार्रवाई
कृषि विभाग ने इस बार निगरानी के लिए कड़ा तंत्र विकसित किया है। विभाग द्वारा बनाए गए कंट्रोल रूम को सेटेलाइट के माध्यम से जैसे ही खेतों में आग लगने की सूचना मिलती है, टीम तत्काल सक्रिय हो जाती है। इस बार उपसंचालक कृषि (डीडीए) स्वयं मैदान में उतरे और फायर ब्रिगेड के साथ मौके पर पहुँचकर आग बुझवाई गई। अधिकारियों का एक विशेष समूह बनाया गया है, जो गूगल शीट के माध्यम से प्रतिदिन की रिपोर्टिंग कर रहा है। विभाग ने किसानों से गुप्त सूचनाएं प्राप्त करने की व्यवस्था भी की थी, जिससे दोषियों की पहचान आसान हो सकी।
जुर्माने की राशि और सख्त नियम
प्रभारी उपसंचालक कृषि ज्ञानसिंह मोहनिया ने बताया कि पराली जलाने पर शासन द्वारा सख्त जुर्माना निर्धारित किया गया है। इसके तहत 2 एकड़ तक की भूमि पर 2500 रुपये, 2 से 5 एकड़ पर 5000 रुपये और 5 एकड़ से अधिक भूमि होने पर 15000 रुपये प्रति घटना का जुर्माना लगाया जा रहा है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे मौके पर जाकर पंचनामा तैयार करें और जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष को तुरंत जानकारी भेजें।
सरदारपुर और बदनावर में सर्वाधिक कार्रवाई
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इस बार 556 किसानों के मौके पर पंचनामे बनाए गए और 241 किसानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। जिले भर में कुल एक लाख 95 हजार रुपये का जुर्माना आरोपित किया गया है, जिसमें से करीब 20 हजार रुपये की वसूली की जा चुकी है। क्षेत्रवार कार्रवाई में सरदारपुर सबसे आगे रहा, जहाँ 153 किसानों पर एक लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया। वहीं बदनावर में 237, पीथमपुर में 132 और धार में 510 किसानों पर प्रशासनिक कार्रवाई की गाज गिरी है।
