फसल बीमा के बीमा कंपनी की जेब में पहुंचे 1 अरब 47 करोड़

ओले और आंधी के बाद 72 घंटे में किसानों को करना होगा क्लेम

उज्जैन, अग्निपथ। उज्जैन जिले में सोमवार की शाम हुई बारिश, ओला वृष्टि और आंधी-तूफान की वजह से उपज को हुए नुकसान की जानकारी बीमा कंपनी को 72 घंटे की अवधि में देना होगी। इसका साफ मतलब है कि बीमा कंपनी सोमवार शाम से अगले 72 घंटे यानि गुरूवार शाम तक अपने पास पहुंचे क्लेम को ही स्वीकार करेगी। अवधि कम होने की वजह से कई किसान भ्रम की स्थिति में है और उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि आगे क्या करे।

ताजा रबी सीजन में किसान, राज्य और केंद्र सरकार की ओर से बीमा कंपनी की जेब में अकेले उज्जैन जिले से करीब 1 अरब 47 करोड़ रूपए जमा हो चुके है। अब बारी किसानों को बीमा रकम बांटने की है, इसके लिए कंपनी ने क्लेम का समय भी निर्धारित कर दिया है।

जिले में गेंहू की उपज को लगभग हर तहसील में ही खासा नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान तराना और महिदपुर क्षेत्र में दर्ज किया गया है। शुरूआती जानकारी सामने आई है कि भारी पैमाने पर नुकसान के बावजूद सोमवार से मंगलवार की शाम के बीच 24 घंटे में महज 200 ही किसान बीमा कंपनी को विधिवत तरीके से नुकसान की सूचना दे सके है। जिले में अब भी हजारों की संख्या में किसान ऐसे है जिन्हें पूरी प्रक्रिया की ही जानकारी नहीं है।

एक नजर बीमे के गणित पर

  • रबी सीजन में जिले के 1 लाख 41 हजार 445 ऋणि और 816 अऋणि किसानों ने फसल बीमा पंजीयन कराया है।
  • जिले में कुल 3 लाख 13 हजार 492.196 हेक्टेयर क्षेत्र की उपज का बीमा ताजा सीजन के लिए दर्ज हुआ है।
  • केंद्र सरकार की एजेंसी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ने उज्जैन जिले में किसानों की उपज का बीमा किया है।
  • इस कंपनी के पास 31 दिसंबर तक की स्थिति में बीमा रकम के रूप में किसानों के पासे 705 रूपए प्रति हेक्टेयर के मान से लगभग 22 करोड़ 9 लाख 62 हजार रूपए बीमा प्रीमियम के रूप में रकम जमा हुई है।
  • राज्य सरकार की ओर से अकेले उज्जैन जिले के लिए 63 करोड़ 57 लाख 33 हजार 557 रूपए और केंद्र सरकार की ओर से भी इतनी ही राशि प्रीमियम के रूप में कंपनी के पास पहुंची है।
  • इस तरह प्रति हेक्टेयर 4 हजार 700 रूपए जमा बीमा प्रीमियम के रूप में जमा हुए है। कुल बीमा रकम का यह 10 प्रतिशत भाग है।
  • नुकसान का अधिकतम 80 प्रतिशत भाग बीमा कंपनी द्वारा किसानों को देय करने का प्रावधान है। यानि रबी सीजन में यदि जिले की पूरी की पूरी फसल नष्ट हो जाती है तो बीमा कंपनी को जिले के किसानों को लगभग 11 अरब, 78 करोड़, 73 लाख रूपए बीमे के रूप में बांटने होंगे।

इन जरियों से दर्ज कराया जा सकता है क्लेम

  • बीमा कंपनी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस ने टोल फ्री नंबर 18002337115 पर सूचना दी जा सकती है।
  • इसके लिए अलावा गूगल प्ले स्टोर से क्रॉप इंश्योरेंस एप्लिकेशन डाउनलोड कर इस पर भी शिकायत दर्ज कर सकते है।
  • ई मेल आईडी पर भी जिले के किसान फसल नुकसान की जानकारी दे सकते है।
  • फसल नुकसान की जानकारी के साथ ही किसानों को बी-1 की कॉपी, आधार कार्ड, जिस खाते से बीमे की प्रीमियम कटी उस बैंक खाते की पास बुक की कॉपी निर्धारित प्रोफार्मा के साथ अपलोड करना होगी।
  • क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी, पटवारी-गिरदावर के जरिए भी फसल नुकसान की जानकारी दर्ज कराई जा सकती है।

जिले में ओले की वजह से हुए नुकसान के आंकलन के लिए मैदानी अमले को जुटा दिया गया है। फसलों को हुए नुकसान का आंकलन कर राहत और मुआवजे की राशि के संबंध में योजना बनाई जा रही है।
– डा. मोहन यादव, उच्चशिक्षा मंत्री

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