फिटनेस के लिए अब इंदौर-उज्जैन की दौड़: धार के वाहन स्वामियों की बढ़ी मुसीबतें

धार, अग्निपथ। परिवहन विभाग द्वारा नए साल में लागू किए गए नए नियमों ने वाहन मालिकों की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर विभाग सुविधाओं के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर धार आरटीओ कार्यालय में वर्षों से जारी फिटनेस सर्टिफिकेट की सुविधा को अचानक बंद कर दिया गया है। 5 जनवरी से लागू नई व्यवस्था के तहत अब वाहनों की फिटनेस मैन्युअल न होकर केवल ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर (एटीएस) पर ही होगी। धार जिले में अपना एटीएस सेंटर नहीं होने के कारण अब हजारों वाहन चालकों को फिटनेस के लिए इंदौर या उज्जैन के चक्कर काटने होंगे। इससे समय और रुपये दोनों की बर्बादी तय है।

15 हजार से अधिक वाहन आरटीओ में पंजीकृत

धार आरटीओ कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले में 15 हजार से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। सामान्य दिनों में यहां प्रतिदिन औसतन 20 से 25 और कई बार 50 से 70 वाहनों की फिटनेस की जाती थी। केंद्र सरकार के नए आदेश के बाद प्रदेश के जिन 32 जिलों में मैन्युअल फिटनेस सुविधा बंद की गई है, उनमें धार भी शामिल है। अब जिले के वाहन मालिकों के पास लंबी दूरी तय करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

अब तक थी यह सरल प्रक्रिया

पूर्व में वाहन चालक ऑनलाइन आवेदन कर सीधे जिला मुख्यालय स्थित आरटीओ कार्यालय पहुँचते थे। वहां मशीनों और अधिकारियों द्वारा 20 से 25 मिनट में जांच प्रक्रिया पूरी कर प्रमाण-पत्र जारी कर दिया जाता था। स्थानीय वाहन स्वामियों का कहना है कि धार जैसे दूरस्थ जिले में स्थानीय स्तर पर ही फिटनेस की अनुमति मिलनी चाहिए ताकि आम जनता को अनावश्यक परेशानी और आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

सरकार को एटीएस पर भरोसा

प्रशासन का तर्क है कि मैन्युअल फिटनेस जांच में पारदर्शिता की कमी और मानवीय हस्तक्षेप की शिकायतें रहती थीं, जिन्हें दूर करने के लिए एटीएस प्रणाली अपनाई गई है। एटीएस में कंप्यूटराइज्ड और कैमरा आधारित सिस्टम से पूरी पारदर्शिता के साथ जांच होती है। हालांकि, इस व्यवस्था से वाहन मालिकों में भारी रोष है और वे फिर से स्थानीय स्तर पर सुविधा शुरू करने के लिए आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।

150 किलोमीटर से अधिक का सफर तय करना होगा मजबूरी

नई व्यवस्था के कारण जिले के विभिन्न क्षेत्रों के वाहन स्वामियों को भारी परेशानी होगी। जिला मुख्यालय से इंदौर की दूरी 65 किलोमीटर है, लेकिन कुक्षी से वाहन चालकों को 167 किलोमीटर, निसरपुर से 181 किलोमीटर, टांडा से 126 किलोमीटर और बाग से लगभग 210 किलोमीटर का सफर तय कर इंदौर जाना होगा। इतनी लंबी दूरी तय करने में न केवल डीजल का खर्च बढ़ेगा, बल्कि रास्ते में तकनीकी खराबी या दुर्घटना होने पर वाहन के अनफिट होने का खतरा भी बना रहेगा।

फर्जी फिटनेस पर प्रहार

यह नई व्यवस्था इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, देवास, जबलपुर, सतना और सिंगरौली जैसे आठ संभागीय शहरों में लागू की गई है। इन केंद्रों पर ही आसपास के 34 जिलों के वाहनों की फिटनेस होगी। धार, खरगोन, अलीराजपुर, बड़वानी और झाबुआ जैसे जिलों के वाहनों को अब इंदौर स्थित एटीएस केंद्रों पर निर्भर रहना होगा। जिम्मेदारों का कहना है कि पीथमपुर में जल्द ही सेंटर शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं, तब तक वाहन चालकों को इसी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।

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