उज्जैन, अग्निपथ। देवासगेट बस स्टैण्ड पर बने महिला यात्री गृह में सुबह से शाम तक पुरूषों का जमावड़ा रहता है और कईं मंदबुद्धि और पागल टाइप के पुरुष यहां अनाप-शनाप हरक तें करते हैं। इसके कारण महिलाओं को बस में सफर के लिए बाहर चबूतरे पर बैठकर इंतजार करना पड़ता है।
90 साल पुराने देवासगेट बस स्टैंड की हालत जर्जर हो चुकी है। यहां साफ-सफाई और सुरक्षा के नाम पर कोई सुविधा दिखाई नहीं देती। यहां मध्यप्रदेश रोडवेज की बसें जब तक चलती थी तब यह टिकट विंडो था लेकिन सरकारी बसें बंद होने के बाद इसे महिलाओं की सुरक्षा के मद्देनजर महिला यात्री गृह बना दिया गया था।
इस महिला यात्री गृह में देवासगेट की तरफ घूमने वाले या भिखारीनुमा युवक रात के समय सो जाते हैं। ऐसा ही नजारा दिन और दोपहर हर समय देखा जा सकता है। इसके अलावा इन पुरूषों को देखकर साधारण लोग भी महिला यात्री गृह में अनावश्यक बैठकर टाइम पास करते हैं जबकि जो वाकई यात्रा के लिए बस स्टैंड पहुंचते हैं वे बाहर बैठकर बसों का इंतजार करते नजर आते हैं।
बुधवार को भी यही नजारा था दोपहर 12.30 बजे आगर-घटिया, शाजापुर-शुजालपुर, उन्हेल, नागदा जाने के लिए बसों का इंतजार करने वाली महिलाएं, युवती और बच्चियों को बाहर प्रांगण में या चबूतरे पर बैठकर इंतजार करना पड़ता है।
इनका कहना
सुबह और रात के समय गश्त के दौरान पुलिस यहां चैकिंग करती है और अनावश्यक बैठे पुरुषों को बाहर करती है। शेष समय में भी यहां चैक करना पड़ेगा। -अनिला कैथवास, टीआई देवासगेट
