बिनोद मिल की चाल में मातम-सा माहौल

भूख हड़ताल पर बैठे लोग, हर आंख में आंसू, घर छिनने के डर से ही बेहोश हो गए तीन लोग

उज्जैन, अग्निपथ। बिनोद मिल की चाल में बने 160 से ज्यादा मकानों को तोडक़र जमीदोज करने की घड़ी आ ही गई है। शुक्रवार की शाम राजस्व विभाग की टीम ने चाल में मुनादी कराई। शनिवार सुबह से मकानों को तोडऩे का काम शुरू कर दिया जाएगा। पिछले लगभग 80 साल से बसी इस बस्ती में घर छिन जाने के डर से ही दो महिलाओं सहित तीन लोग बेहोश हो गए। इन्हें जिला अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। चाल के रहवासियों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। इसी बीच शुक्रवार रात बड़ी संख्या में पुलिसबल ने चाल में चहल-कदमी की।

बिनोद मिल की कुल जमीन लगभग 92 बीघा है। इसमें से लगभग 6 बीघा जमीन पर चाल बसी हुई है। मिल के चलते रहने के वक्त यहां 111 परिवारों के घर बसे हुए थे। परिवार बढ़ते चले गए और मकानों की संख्या 160 तक पहुंच गई। मिल की जमीन को राज्य सरकार द्वारा 9 टुकड़ो में अलग-अलग टेंडर के जरिए बेचा जा रहा है। राज्यशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कलेक्टर आशीष सिंह को निर्देशित किया है कि किसी भी सूरत में 15 दिसंबर तक मिल की चाल वाली जमीन भी रिक्त कराई जाए। इसी निर्देश के बाद कलेक्टर आशीषसिंह ने भी स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की बात सुनना तक बंद कर दिया है।

नेताओं से मिले कोरे आश्वासन

बिनोद मिल की चाल में रहने वाले परिवारों के लोग पिछले लगभग एक सप्ताह से अलग-अलग आंदोलन कर रहे है। ये लोग विधायक पारस जैन, सांसद अनिल फिरोजिया से भी मिले। दोनों ही जनप्रतिनिधियों से इन्हें कोरे आश्वासन ही मिले है। दोनों ही जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से बात करने का हवाला दिया और अपने पाले से गेंद को प्रशासन के पाले में डाल दिया।

धर्म परिवर्तन की चेतावनी, संघ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन

शुक्रवार की शाम बिनोद मिल की चाल के रहवासी सरदारपुरा स्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यालय पर भी पहुंचे। संघ कार्यालय के बाहर करीब आधे घंटे तक धरना दिया और नारेबाजी की। संघ के किसी भी बड़े पदाधिकारी ने इनसे बात नहीं की। चाल के रहवासियों ने संघ कार्यालय पर एक पत्र दिया है जिसमें कहा गया है कि संघ के प्रश्रय वाली भाजपा की सरकार ने महाकाल लोक के निर्माण के वक्त अल्पसंख्यक समुदाय के परिवारों को 3-3 लाख रूपए मुआवजा दिया। विनोद मिल की चाल के मामले में राज्य सरकार का रवैया अलग है लिहाजा अब चाल वालों के सामने धर्म परिवर्तन कर ईसाई बन जाने के अलावा कोई चारा नहीं है।

अस्पताल में भर्ती हुए तीन लोग

बिनोद की चाल में रहने वाले गणेशलाल रायकवार, सीमा परिहार और बसंतीबाई विश्वकर्मा इन तीनों को शुक्रवार शाम जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। तीनों ही अपने मकान छिन जाने के डर से ही बेहोश हो गए थे। बसंतीबाई विश्वकर्मा, उनका बेटा नरेंद्र विश्वकर्मा, उसकी पत्नी और दो बच्चे चाल के रहवासियों से अलग विनोद मिल के गेट के बाहर आमरण अनशन पर बैठे है।

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