बैंक कर्ज न चुकाने वाले दो दोषियों को एक-एक वर्ष की जेल

खरगोन, अग्निपथ। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा करही से कर्ज लेकर भुगतान न करने वाले डिफाल्टरों के खिलाफ न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी महेश्वर सुश्री दिव्या विश्वकर्मा ने चेक बाउंस के मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी ओंकार पिता राजाराम सेन निवासी करही और जितेंद्र पिता रामलाल मालवीय निवासी कवाणा को एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है।

क्या था मामला

बैंक रिकॉर्ड के अनुसार, करही निवासी ओंकार ने 50 हजार रुपये और कवाणा निवासी जितेंद्र ने 6 लाख 80 हजार रुपये का लोन बैंक से लिया था। बैंक द्वारा बार-बार तकादा करने के बावजूद जब आरोपियों ने राशि जमा नहीं की, तो उनके द्वारा दिए गए चेक बैंक में जमा किए गए, जो बाउंस हो गए। इसके बाद बैंक की ओर से शाखा प्रबंधक चेतन डोंगरे और अधिवक्ता अक्षय राठौर ने न्यायालय में धारा 138 एनआई एक्ट के तहत परिवाद दायर किया। साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर कोर्ट ने दोनों को जेल भेजने के आदेश दिए।

बकायादारों को सख्त चेतावनी

सहकारी बैंक की प्रभारी प्रबंध संचालक संध्या रोकड़े ने इस फैसले के बाद अन्य बकायादारों को स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जो कर्जदार जानबूझकर बैंक का पैसा नहीं लौटा रहे हैं और जिनके चेक बाउंस हो रहे हैं, उनके खिलाफ बैंक अब इसी तरह की सख्त कानूनी कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने अपील की है कि सभी बकायादार अप्रिय कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए तुरंत अपनी बकाया राशि बैंक में जमा कराएं, अन्यथा बैंक सख्त कदम उठाना जारी रखेगा।

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