नई दिल्ली, अग्निपथ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में बुधवार को देश के औद्योगिक कायाकल्प के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने ‘भव्य’ (भारत औद्योगिक विकास योजना) को मंजूरी दे दी है। इस महात्वाकांक्षी परियोजना पर कुल 33,660 करोड़ रुपये की लागत आएगी। योजना का मुख्य आकर्षण देशभर में 100 नए औद्योगिक पार्कों का विकास करना है। इन पार्कों में उद्योगों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा जैसे भूमि, बिजली और पानी की सुविधा पहले से ही तैयार मिलेगी, जिससे निवेशकों को किसी भी प्रकार की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार का लक्ष्य इस पहल के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना है।
छोटे जल विद्युत प्रोजेक्ट्स और बुनियादी ढांचे पर जोर
ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हुए कैबिनेट ने 2,585 करोड़ रुपये की लघु जल विद्युत विकास योजना को भी स्वीकृति दी है। इसके अंतर्गत वर्ष 2030-31 तक 1,500 मेगावाट क्षमता की छोटी बिजली परियोजनाएं लगाई जाएंगी। ये परियोजनाएं मुख्य रूप से नदियों के प्राकृतिक बहाव पर आधारित होंगी, जिससे बड़े बांधों के निर्माण और विस्थापन जैसी समस्याओं से बचा जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के लिए उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से बहराइच के बीच 4-लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-927 के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिस पर लगभग 6,969 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
कपास किसानों के लिए बड़ी वित्तीय सहायता का ऐलान
खेती-किसानी के मोर्चे पर सरकार ने कपास उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए 1,718.56 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। यह फंड भारतीय कपास निगम को प्रदान किया जाएगा ताकि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कपास की निर्बाध खरीद सुनिश्चित की जा सके। इस निर्णय से देश के लगभग 60 लाख कपास किसानों को सीधे तौर पर लाभ होगा। जब भी बाजार में कपास की कीमतें निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे गिरेंगी, सरकारी एजेंसी बिना किसी सीमा के किसानों की पूरी उपज खरीदेगी। इससे न केवल किसानों की आय सुरक्षित होगी, बल्कि टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े करोड़ों लोगों की आजीविका को भी संबल मिलेगा।
