विकसित भारत 1947 के लिए सशक्त कदम बनेगी
उज्जैन, अग्निपथ। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतिहर मजदूरों को गारंटी से रोजगार देने वाली योजना मनरेगा का नाम और योजना में आमूलचूल परिवर्तन कर भाजपा सरकार ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पूरा करने के लिए वी बी जी रामजी योजना की शुरुआत की है।
योजना को लेकर उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने रविवार को प्रेस से चर्चा की।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि वृद्धिशील सुधार की बजाय संरचनात्मक बदलाव की जरूरत को समझते हुए एनडीए सरकार ने विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम को वी बी जी रामजी योजना का नाम दिया है। रोजगार गारंटी का यह कानून बनाया गया है। यह अधिनियम मनरेगा की जगह लेता है और ग्रामीण रोजगार को सतत विकास का साधन बनाता है। जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप है।
यह बात जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेतवाल ने सोमवार को संभागीय भाजपा कार्यालय लोकशक्ति भवन में पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि जॉब कार्ड जो पूर्ववर्ती सरकारों में फर्जी बन गए थे उसकी जांच होगी। उसे निरस्त कर नए सिरे से योजना लागू होगी। ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों ने भारत की सामाजिक आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, ये केवल कमजोर परिवारों को आय की सुरक्षा नहीं देते बल्कि परिसम्पति निर्माण के साथ ग्राम विकास और सामाजिक स्थिरता के साधन भी है, चूंकि बड़ी संख्या में लोग कृषि और उससे जुड़े कामों पर निर्भर है, इसीलिए मौसमी बेरोजगारी और आय में उतार चढ़ाव लगातार चुनौती बने रहते है।
टेंटवाल ने कहा वर्ष 2006 में महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम (मनरेगा) ने इन समस्याओ को हल करने और मजदूरी रोजगार की गारंटी देने का प्रयास किया। कार्यक्रम शुरूआती वर्षों में तेजी से फैला और कई परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की, लेकिन कमजोर प्रशासन, भ्रष्टाचार और विकास उन्मुख दृष्टिकोण की कमी के कारण इसका दीर्घकालिक प्रभाव कमजोर रह गया। राम राज्य की स्थापना के लिए और महात्मा गांधी जी की भावना के अनुरूप वीबी जी रामजी बिल लाया गया है। उन्होंने कहा कि आखिर कांग्रेस और इंडी गठबंधन को विकसित भारत और भगवान् राम के नाम से इतनी नफरत क्यों है? कांग्रेस कितनी भी साजिश रच ले, देश 2047 तक ’विकसित भारत’ बन कर रहेगा।
योजना पुरस्कारों के नाम गांधी परिवार पर क्यों ?
टेटवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार देश के लगभग 600 संस्थानों, योजनाओं, पुरस्कारों के नाम गाँधी परिवार के नाम पर रखे। देश के खेल रत्न अवार्ड को भी राजीव गाँधी के नाम पर रखा गया जबकि खेल में राजीव गाँधी का कोई योगदान नहीं था। कांग्रेस पार्टी ने नेहरू-गांधी खानदान के सदस्यों की जन्मतिथि को राष्ट्रीय पर्व बना दिया और पुण्यतिथि को राष्ट्रीय शोक का दिन। कांग्रेस की सरकारों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी, सरदार वल्लभ भाई पटेल जी, लाल बहादुर शास्त्री जी जैसे कई नेताओं के साथ दोयम दर्जे का बर्ताव किया गया।
