धार, अग्निपथ। धार में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी ही सरकार की मशीनरी को कटघरे में खड़ा करते हुए मनरेगा योजना में बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया है। उन्होंने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों और बिचौलियों के बीच गहरी सांठगांठ होने का सनसनीखेज आरोप लगाया।
‘गड्ढा करो और गड्ढा भरो’ योजना का दिया हवाला
मंत्री विजयवर्गीय ने मनरेगा की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे ‘गड्ढा करो और गड्ढा भरो’ योजना करार दिया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर योजना का व्यापक दुरुपयोग हो रहा है। विजयवर्गीय ने भ्रष्टाचार के तरीके का खुलासा करते हुए दावा किया कि गुजरात में बैठे मजदूरों के जॉब कार्ड में मजदूरी की राशि डाली जाती है। जब वह मजदूर वापस आता है, तो बैंक से राशि निकालकर मात्र 10 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखता है और शेष 90 प्रतिशत राशि संबंधित अधिकारियों को सौंप दी जाती है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह पूरा खेल अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
भ्रष्टाचार के मॉडल पर उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान श्री विजयवर्गीय ने सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र को निशाने पर लिया। उन्होंने अधिकारियों पर मजदूरों के साथ मिलकर सरकारी धन की बंदरबांट करने के गंभीर आरोप लगाए। मंत्री के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि प्रदेश में लंबे समय से भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी भाजपा ही सत्तासीन है। ऐसे में अपनी ही सरकार के कार्यकाल के दौरान चल रही व्यवस्था पर इतने वरिष्ठ मंत्री के प्रहार को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जवाबदेही और कार्रवाई का प्रश्न
विजयवर्गीय के इन बयानों के बाद अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या सरकार इन गंभीर आरोपों के आधार पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध जांच के आदेश देगी? कैबिनेट मंत्री द्वारा सार्वजनिक मंच से भ्रष्टाचार के इस ’90-10 मॉडल’ का पर्दाफाश किए जाने के बाद अब प्रशासन की निष्पक्षता और दोषियों पर होने वाली संभावित कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
