महाकाल मंदिर के आसपास तलाशे जा रहे रहस्य, पुरातत्ववेत्ताओं ने 11वीं सदी की प्राचीन बस्ती खोजी

2 घंटे 4 मीटर से अधिक खुदाई की, इल्तुमिश द्वारा तोडऩा बताया

उज्जैन, अग्निपथ। श्री महाकालेश्वर मंदिर के विस्तारीकरण के लिए मंदिर के 500 मीटर के दायरे में तेजी से खुदाई की जा रही हैं । खुदाई के दौरान एक बार फिर सैकड़ों साल पुराने मंदिर के अवशेष मिले है । पूर्व में दुर्गा मूर्ति मिली थी लेकिन बुधवार को भोपाल से आए पुरातत्ववेत्ताओं ने दो घंटे खुदाई कर यहां पर दीवार का एक खंड भी पाया है। पुरातत्ववेत्ताओं ने यहां पर बड़ी बस्ती होना भी बताया है। जिसको आक्रांता इल्तुमिश ने तहस नहस कर दिया था।

पुरातत्वविद डॉ. रमेश यादव ने बताया कि महाकाल मंदिर में पहले भी 1000 साल पुराने परमारकालीन अवशेष मिले थे । इस बार खुदाई के दौरान मंदिर के स्थापत्य खंड मिले हैं । इन्हें देखकर पता चलता है कि ये भी परमारकालीन हैं। ये अवशेष करीब सन 1232 के हैं , जब दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश ने उज्जैन पर हमला किया था । उसने मंदिर को भी नुकसान पहुंचाया था ।

उन्होंने बताया कि टीम द्वारा दो घंटे तक 4 मीटर गहरी खुदाई की गई। जिसमें एक दीवार मिली है जोकि शुंगकाल की प्रतीत होती है। यहां पर एक बड़ी बस्ती रही होगी। महाकाल मंदिर और इसके आसपास के मंदिर तोडऩे के बाद बस्ती पर भी हमला किया गया होगा, जिसके अवशेष दब गए होंगे। इससे पहले दिसंबर 2019 में भी 1000 साल पुराने शिलालेख मिले थे । इस बार मिली मूर्तियां भी 700 से 1000 साल पुरानी बताई जा रही है । इन्हें फिलहाल मंदिर के अन्न क्षेत्र में रखवाया गया है ।
डॉ. रमेश यादव के साथ इनकी टीम में डॉ. धुवेन्द्रसिंह जोधा, डॉ. योगेश पाल और डॉ. राजेश कुमार भी शामिल थे। अपना प्रतिवेदन शासन को प्रस्तुत करेंगे।

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