महाकाल मंदिर में शिव की नवरात्रि, 10 दिन तक उत्सव की धूम

6 से 16 फरवरी तक उत्सव, दूल्हा बनेंगे बाबा, रोज शृंगार दर्शन, 15 को महाशिवरात्रि

उज्जैन, अग्निपथ। महाकाल मंदिर में आज शुक्रवार से शिव नवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। 10 दिनों तक उत्सव की धूम रहेगी। 6 फरवरी से पर्व शुरू होकर यह महाशिवरात्रि 15 फरवरी और इसके अगले दिन 16 फरवरी को दिन की भस्मारती तक चलेगा।

इस दौरान भगवान महाकाल दूल्हा बनेंगे और भक्तों को प्रतिदिन दिव्य शृंगार में दर्शन देंगे। भगवान शिव के विवाह उत्सव की शुरुआत मंदिर परिसर में कोटितीर्थ कुंड के किनारे स्थित श्री कोटेश्वर महादेव मंदिर में पूजन से की जाएगी। इसके बाद 11 ब्राह्मण गर्भगृह के अंदर अभिषेक-पूजन करेंगे। दोपहर में भगवान की भोग आरती संपन्न होगी व इसके बाद भगवान का शृंगार किया जाएगा।

शिव की नवरात्रि में प्रतिदिन यहीं क्रम चलेगा। इसका समापन महाशिवरात्रि पर्व पर होगा। इसके अगले दिन 16 फरवरी की सुबह भगवान महाकाल के सेहरा दर्शन होंगे व दोपहर में 12 बजे भस्मारती की जाएगी।

जानिए भगवान महाकाल का किस दिन कौन सा शृंगार होगा

  • 6 फरवरी – पहले दिन भगवान का अभिषेक-पूजन कर हल्दी लगाकर दूल्हा बनाया जाएगा। शाम को भांग व चंदन से शृंगार होगा।
  • 7 फरवरी – भगवान को नवीन वस्त्र धारण कराकर चांदी के आभूषण पहनाए जाएंगे। श्रृंगार कर पूजा-अर्चना की जाएगी।
  • 8 फरवरी – शेषनाग धारण कराने के साथ ही रंगीन वस्त्र एवं चांदी के आभूषण से शृंगार।
  • 9 फरवरी – पूजन के बाद भगवान को घटाटोप का चांदी का मुखौटा धारण कराकर नवीन वस्त्र पहनाकर कटरा, मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुण्डमाल, छत्र, माला एवं फलों की माला से सजाया जाएगा।
  • 10 फरवरी – छबीना स्वरूप में चांदी का मुखौटा धारण कराकर नवीन पीले रंग के वस्त्र धारण करवाए जाएंगे। फलों की माला पहनाई जाएगी।
  • 11 फरवरी – पूजन के पश्चात बाबा को चांदी का होल्कर का मुखौटा व नवीन वस्त्र धारण करवाए जाएंगे। मुंड माल और फलों की माला धारण कराएंगे।
  • 12 फरवरी – बाबा महाकाल उमा-महेश स्वरूप धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे। चांदी के आभूषण, नवीन वस्त्र में सजेंगे।
  • 14 फरवरी – महाकाल शिव तांडव के रूप में दर्शन देंगे। भगवान को वस्त्र, कुंडल, चंद्रमा, चांदी की नरमुंड और फलों की माला धारण कराई जाएगी।
  • 15 फरवरी – महाशिवरात्रि पर्व पर महाकाल के शिवलिंग पर दिनभर जल अर्पित होगा। करीब 44 घंटे तक भगवान महाकाल के दर्शन होंगे।
  • 16 फरवरी – अल सुबह चांदी का सप्तधान का मुखौटा धारण कराकर सवा मन फूलों का सेहरा सजाया जाएगा।

पूरी दुनिया में केवल महाकाल मंदिर में ही मनाई जाती है शिव की नवरात्रि

पूरी दुनिया में केवल उज्जैन के ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में ही शिव की नवरात्रि मनाने की परंपरा है। जबकि देश व दुनिया में देवी की नवरात्रि ही मनाई जाती है। महाकाल मंदिर के पुजारी आशीष गुरु ने बताया कि महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व से पहले नौ दिन की शिव नवरात्रि मनाई जाती है। इस दौरान प्रतिदिन भगवान का अभिषेक-पूजन व नए स्वरूपों में शृंगार किया जाता है। देश के अन्य प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों व शिव मंदिरों में केवल महाशिवरात्रि का पर्व ही मनाया जाता है।

महाशिवरात्रि पर महाकाल में प्रवेश हेतु पंडे-पुजारियों के लिए अलग गेट रहेगा

उज्जैन, अग्निपथ। महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व के दौरान प्रवेश के लिए पंडे-पुजारियों के लिए अलग से गेट निर्धारित किया गया है। ताकि किसी को भी मंदिर में प्रवेश करने में कोई दिक्कत न आए। इसके अलावा पूजन सामग्री आदि भी समय पर उपलब्ध हो इसके लिए भी विशेष निर्देश दिए गए है।

पर्व की तैयारियों को लेकर गुरुवार को मंदिर समिति ने पंडे-पुजारियों की बैठक बुलाई जिसमें विभिन्न विषयों पर चर्चा कर निर्णय लिए गए। बैठक में मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं के साथ पंडे-पुजारियों के लिए भी व्यवस्थाएं की गई है। पूजन कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए आवागमन हेतु गेट नंबर 13 निर्धारित किया है, ताकि सभी समय पर और बिना किसी असुविधा के मंदिर परिसर में पहुंच सकें।

पूजन सामग्री को मंदिर के भीतर लाने की व्यवस्था को भी सरल बनाया गया है ताकि अभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठान निर्बाध रूप से चलते रहें। महाशिवरात्रि के उपरांत आयोजित भोजन प्रसादी के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं, ताकि वहां भी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहे।

बैठक में पुजारी आशीष गुरु, पुजारी दिलीप गुरु, पुजारी विजय गुरु, पुरोहित लोकेश व्यास, दीपक शर्मा, शिवम शर्मा सहित कई पंडे-पुजारी व मंदिर समिति के सहायक प्रशासक मूलचन्द जूनवाल प्रमुख रूप से मौजूद रहे।