त्रिवेणी पर शिप्रा किनारे बनेगा, पिछले साल नवंबर में ही मुख्यमंत्री कर चुके घोषणा
उज्जैन, अग्निपथ। महाकाल लोक के बाद उज्जैन में अब शनि लोक बनने जा रहा है। इसके निर्माण में अनुमानित 110 करोड़ रुपए खर्च होंगे। महाकाल लोक तो ज्योतिर्लिंग मंदिर के ठीक पीछे रुद्रसागर के किनारे निर्मित किया गया। शनि लोक इंदौर रोड फोरलेन त्रिवेणी पर स्थित प्राचीन नवग्रह शनि मंदिर के पास शिप्रा के किनारे पर बनेगा।
शनि लोक का निर्माण कर इसे धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनाया जाएगा। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने की थी। यह देश का पहला ऐसा मंदिर माना जाता है, जहां भगवान शनि, शिव स्वरूप में विराजमान हैं। वर्ष में आनेव वाली प्रत्यके शनिश्चरी अमावस्या पर्व पर यहां मेला लगता है।
हजारों लोग दर्शन-पूजन व शिप्रा में नहान के लिए उमड़ते हैं। उल्लेखनीय है कि साल 2022 में महाकाल लोक बनने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे न सिर्फ श्रद्धालु बढ़े बल्कि मंदिर समिति की आय भी बढ़ी। इतना ही नहीं इससे पूरे शहर में लोगों के आय के स्त्रोत बढ़ गए तथा सिंहस्थ 2028 तक इसमें कई गुना वृद्धि हो जाएगी। मध्य प्रदेश सरकार भी उज्जैन को नए धार्मिक पर्यटन मॉडल के रूप में पूरे विश्व में प्रचारित करने में जुट गई है।
शनि लोक की डीपीआर तैयार सिंहस्थ 28 से पहले बनेगा
उज्जैन में शनि लोक का निर्माण महाकाल लोक की तर्ज पर ही किया जाएगा। 8 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे बनाने की घोषणा की थी। शनि लोक की डीपीआर बन चुकी है। टेंडर होने के बाद जल्द ही काम शुरू होगा। सरकार की ओर से पूरी कोशिश है कि सिंहस्थ 2028 के पहले शनि लोक बनकर तैयार हो जाए। शनि मंदिर करीब 21 हजार 100 वर्ग मीटर इलाके में फैला है। इसे नवग्रह मंदिर के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह मंदिर सभी नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु को समर्पित है।
