उज्जैन, अग्निपथ। महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। देश के कोने-कोने से आए साढे़ 8 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए की गई व्यापक व्यवस्थाओं के चलते इतनी बड़ी संख्या में भक्तों ने सुगमता से दर्शन किए।
भीड़ से बचने और कम समय में दर्शन की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर समिति ने 250 रुपये के ‘शीघ्र दर्शन’ टिकट की व्यवस्था की थी। इस सुविधा का लाभ उठाते हुए 25,000 श्रद्धालुओं ने विशेष कतार के माध्यम से दर्शन किए। इससे मंदिर समिति को कुल 62 लाख 50 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि 15 फरवरी 2026 को 20,700 श्रद्धालुओं ने टिकट खरीदे, जिससे 51 लाख 75 हजार रुपये मिले। वहीं, दूसरे दिन 16 फरवरी 2026 को 4,300 लोगों ने टिकट लिए, जिससे 10 लाख 75 हजार रुपये की आय हुई।
सुव्यवस्थित दर्शन और डिजिटल प्रणाली
प्रशासन ने आम कतार के साथ-साथ सशुल्क दर्शन के लिए बैरिकेडिंग कर एक पूरी अलग लाइन चलाई थी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चारधाम मंदिर के पास भील धर्मशाला के प्रवेश द्वार पर ही टिकट काउंटर लगाए गए थे, ताकि भक्त हाथों-हाथ टिकट लेकर शीघ्र दर्शन कर सकें। सुव्यवस्थित कतार प्रबंधन, पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था और डिजिटल टिकटिंग प्रणाली के माध्यम से श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराए गए।
नौ दिनों में 400 क्विंटल लड्डू प्रसाद की बिक्री
महाशिवरात्रि पर्व के दौरान महाकाल मंदिर में प्रसाद की भी रिकॉर्ड बिक्री हुई। शिव नवरात्रि के नौ दिनों और समापन के दिन को मिलाकर विभिन्न काउंटरों से लगभग 400 क्विंटल लड्डू प्रसाद बिका। समिति के अधिकारियों के अनुसार, 6 फरवरी से शुरू हुए शिव नवरात्रि उत्सव का समापन 16 फरवरी को हुआ। इस अवधि के दौरान श्रद्धालुओं ने रागी और बेसन के लड्डू खरीदे। समिति ने 1 करोड़ 95 लाख रुपये की लागत से तैयार 410.6 क्विंटल प्रसाद का विक्रय किया। चिंतामन स्थित प्रसाद निर्माण इकाई ने मांग को देखते हुए पहले से ही पर्याप्त स्टॉक तैयार रखा था और स्थाई काउंटरों के साथ-साथ कई अस्थाई काउंटर भी खोले गए थे।
