मोड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र: 2.43 करोड़ का भवन एक साल से तैयार, फिर भी इलाज को भटक रहे ग्रामीण

सुसनेर, अग्निपथ। विधानसभा चुनाव के दौरान जनआशीर्वाद यात्रा में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा दी गई सौगात अब जिम्मेदारों की उदासीनता की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ग्राम पंचायत मोड़ी में 2 करोड़ 43 लाख रुपये की लागत से निर्मित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सर्वसुविधायुक्त भवन बनकर तैयार है और विभाग को हैंडओवर हुए भी एक वर्ष बीत चुका है। इसके बावजूद अब तक अस्पताल का संचालन शुरू नहीं हो सका है, जिसके कारण क्षेत्र की जनता को शासन की इस महत्वपूर्ण सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

एक वर्ष से चौकीदार के भरोसे वीरान पड़ा भवन

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023-24 में निर्मित यह भवन जनवरी 2025 में ही ठेकेदार द्वारा स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया गया था। एक साल से यह आलीशान भवन केवल एक चौकीदार के भरोसे है और बंद रहने के कारण असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। इस संबंध में जब जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। वर्तमान में मोड़ी क्षेत्र के ग्रामीणों को छोटी-बड़ी बीमारियों, दुर्घटना या प्रसव जैसी स्थितियों में 12 से 15 किलोमीटर दूर सुसनेर या आगर जाना पड़ता है।

जिम्मेदारों के आश्वासन

“मोड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के संबंध में जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से बात कर सकते हैं।” — श्रीमती प्रीति यादव, जिला कलेक्टर, आगर मालवा

“भवन संचालन शुरू कराने के संबंध में अधिकारियों से चर्चा कर जानकारी लेता हूँ। जल्द ही इसे शुरू करने का प्रयास करेंगे।” — भैरूसिंह परिहार बापू, विधायक, सुसनेर

“मामला संज्ञान में आया है। मुख्यमंत्री जी से मिलकर जल्द ही केंद्र शुरू करने के प्रयास किए जाएंगे।” — मुरलीधर पाटीदार, पूर्व विधायक, सुसनेर

14 फरवरी 2026

00000

ऑक्सीजन की कमी से मौत मामला: जांच दल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

फोटो – 2

सुसनेर, अग्निपथ। नगर के सिविल अस्पताल में 16 जनवरी को ऑक्सीजन की कमी से गोपाल प्रजापत नामक युवक की मृत्यु के मामले में गठित जांच दल अब खुद सवालों के घेरे में है। एसडीएम के पत्र के बाद जिला चिकित्सा अधिकारी द्वारा करवाई गई जांच प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं। आरोप है कि जांच दल ने उन मुख्य जिम्मेदार कर्मचारियों के बयान तक दर्ज नहीं किए, जिनका सीधा संबंध ऑक्सीजन प्रबंधन से था।

जिम्मेदार कर्मचारियों के बयान न लेना संदेहास्पद

मामले में ऑक्सीजन सिलेंडर की देखरेख करने वाले स्टोर कीपर, वार्ड इंचार्ज और वार्ड बॉय के बयान नहीं लिए गए हैं, जबकि सिलेंडर के स्टॉक और प्रबंधन के लिए यही तीनों उत्तरदायी होते हैं। उल्लेखनीय है कि 16 जनवरी को गोपाल को फांसी के फंदे से उतारकर परिजन अस्पताल लाए थे। रेफर के दौरान रास्ते में सिलेंडर की ऑक्सीजन खत्म होने के आरोप लगे थे, जिसके बाद जमकर हंगामा हुआ था। अब जांच दल द्वारा महत्वपूर्ण गवाहों और जिम्मेदारों को छोड़ने से पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

Breaking News