उज्जैन, अग्निपथ। दोपहर के ठीक 1:55 बजे थे, तभी रतलाम मंडल कंट्रोल कार्यालय के फोन घनघना उठे। सूचना मिली कि फतेहाबाद चंद्रावतीगंज–चिंतामन गणेश सेक्शन के समपार संख्या 4 पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली रोल डाउन होकर ट्रेन की राह में आ गई है। सूचना मिलते ही पूरे मंडल में हड़कंप मच गया और शुरू हुआ रेलवे की मुस्तैदी का सबसे बड़ा इम्तिहान।
युद्धस्तर पर जुटीं टीमें, मिनटों में रवाना हुई राहत गाड़ियाँ
हादसे की खबर मिलते ही एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (एआरटी) और मेडिकल इक्विपमेंट वैन (एआरएमई) के सायरन गूंज उठे। डॉक्टर्स की टीम, तकनीकी विशेषज्ञ और बचाव दल अपनी पूरी किट के साथ प्लेटफॉर्म पर दौड़ पड़े। घड़ी की सुइयों के साथ मुकाबला करते हुए, निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही राहत गाड़ियाँ सायरन बजाते हुए घटनास्थल की ओर रवाना हो गईं। मंडल कार्यालय के कंट्रोल रूम में बैठे उच्च अधिकारी पल-पल की लोकेशन ट्रैक कर रहे थे।
जब अधिकारियों ने कहा- ‘यह मॉक ड्रिल है’
राहत दल और भारी मशीनों के साथ जब अधिकारी समपार संख्या 4 पर पहुँचे और मोर्चा संभाला, तब वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे ‘मॉक ड्रिल’ घोषित किया। दरअसल, यह अभ्यास यह जाँचने के लिए था कि वास्तविक दुर्घटना की स्थिति में रतलाम मंडल का अमला कितनी तेजी और सटीकता से रेस्पॉन्स करता है। वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी डी.एम. सिंह के मार्गदर्शन में चली इस ड्रिल में हर विभाग की सक्रियता को बारीकी से परखा गया।
सुरक्षा तैयारियों का लिटमस टेस्ट
जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की सतर्कता और आपदा प्रबंधन उपकरणों की कार्यक्षमता का परीक्षण करना था। मौके पर सहायक मंडल संरक्षा अधिकारी सहित विभिन्न विभागों का स्टाफ मौजूद रहा। रेलवे का दावा है कि इस सफल अभ्यास से यह सिद्ध हुआ है कि रतलाम मंडल किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए 24×7 पूरी तरह तैयार है।
