सीहोर,अग्निपथ। सीहोर-भोपाल सड़क निर्माण कार्य बिलकिसगंज क्षेत्र के रहवासियों के लिए विकास कम और विनाशकारी प्रदूषण की समस्या अधिक लेकर आया है। खुदाई और भारी वाहनों की आवाजाही से उठने वाले धूल के गुबार ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है। आलम यह है कि हवा में जहर की तरह घुली धूल के कारण लोगों का दम घुटने लगा है, लेकिन निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
एक सप्ताह से खुदा पड़ा चौराहा, पानी का छिड़काव तक नहीं
स्थानीय निवासियों ने बताया कि बिलकिसगंज जोड़ चौराहे पर पिछले एक सप्ताह से सड़क खोदकर छोड़ दी गई है। नियमतः निर्माण स्थल पर धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी का छिड़काव होना चाहिए, लेकिन निर्माण एजेंसी द्वारा इसकी घोर अनदेखी की जा रही है। न तो मलबे को ढका गया है और न ही पानी डाला जा रहा है, जिससे दिनभर उड़ती धूल की मोटी परत घरों और दुकानों के भीतर तक जम रही है।
बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित, बढ़ रही बीमारियां
वायु प्रदूषण की इस भयावह स्थिति ने खासकर बच्चों, बुजुर्गों और दमा रोगियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सड़कों पर दृश्यता कम होने के साथ-साथ लोगों में लगातार खांसी, आंखों में जलन और सांस फूलने जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दी है कि यदि तुरंत धूल पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह क्षेत्र में फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
पर्यावरण नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां
क्षेत्रवासियों ने निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग के विरुद्ध आक्रोश व्यक्त करते हुए मांग की है कि पर्यावरण नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक निर्माण स्थल पर ठोस सुरक्षा उपाय और पानी का छिड़काव शुरू नहीं होता, तब तक उनका जीवन दांव पर लगा रहेगा। फिलहाल, प्रशासन की उदासीनता के कारण हजारों लोग प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।
