नागदा, अग्निपथ। बिजनेस विस्तार और एफडीआई के माध्यम से गेहूं खरीदी के टेंडर दिलाने के नाम पर लगभग 12 करोड़ 90 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले सात आरोपियों को न्यायालय ने कड़ी सजा सुनाई है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश परमानंद चौहान ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी सात दोषियों को पांच-पांच साल के सश्रम कारावास की सजा और 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। सजा पाने वालों में नागदा के जवाहर मार्ग स्थित ‘किसान बाजार’ दुकान के संचालक पोरवाल परिवार के सदस्य भी शामिल हैं।
अपर लोक अभियोजक समर्थ साहू के अनुसार, फरियादी मोहम्मद इरफान (निवासी जावरा) ने 21 अगस्त 2019 को सिटी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मुख्य आरोपी विजय पोरवाल ने इरफान को प्रलोभन दिया था कि उसे बिजनेस विस्तार और गेहूं खरीदी के टेंडर के लिए रुपयों की आवश्यकता है, जिसमें निवेश करने पर उसे भारी मुनाफा दिया जाएगा। इसके झांसे में आकर इरफान ने अप्रैल 2015 से मार्च 2018 के बीच विजय और उसके साथियों को करीब 12 करोड़ 90 लाख रुपये दिए।
नोटबंदी और जीएसटी का बहाना बनाकर हड़पे रुपये
विजय पोरवाल ने निवेश की राशि लेने के बाद वर्ष 2016 में हुई नोटबंदी और बाद में जीएसटी लागू होने का बहाना बनाकर मुनाफा देने में असमर्थता जताई। जांच में खुलासा हुआ कि विजय ने इस राशि का उपयोग किसी बिजनेस में नहीं किया, बल्कि अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर आपस में बांट लिया। पुलिस ने जब दबाव बनाया, तो आरोपियों ने नागदा स्थित अपने रिश्तेदारों से खल-कपास्या खरीदी के फर्जी बिल पेश किए। कूट रचित दस्तावेज और षड्यंत्र की पुष्टि होने पर पुलिस ने मामले में धाराएं बढ़ाईं और चालान न्यायालय में पेश किया।
इन आरोपियों को सुनाई गई सजा
प्रकरण में कुल 10 आरोपी थे। मुख्य आरोपी विजय पोरवाल की मौत विचारण के दौरान 10 मार्च 2023 को हो गई थी। दो अन्य आरोपियों, पंकज पोरवाल और मोहम्मद शाकिर का फरियादी से राजीनामा होने के कारण वे दोषमुक्त हो गए। न्यायालय ने शेष सात आरोपियों राजकुमार पोरवाल, अलका पोरवाल, शंभूदयाल पोरवाल, पिंकी पोरवाल, जगदीश पोरवाल, सुरेंद्र पोरवाल और गोपालकृष्ण उर्फ गोपाल पोरवाल को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
शंभूदयाल पर बैंक गबन और फर्जी खाद के भी आरोप
सजा पाने वाले आरोपियों में शामिल शंभूदयाल पोरवाल का विवादों से पुराना नाता रहा है। उन पर नागदा के आईसीआईसीआई बैंक में किसानों के केसीसी खातों में हेरफेर कर गबन करने का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके अतिरिक्त, खंडवा के व्यापारी अशोक पालीवाल के साथ 21.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी का भी मामला दर्ज हुआ था, जिसमें बाद में समझौता हो गया। स्थानीय स्तर पर शंभूदयाल की ‘किसान बाजार’ दुकान पर कई बार प्रतिष्ठित कंपनियों की बोरियों में लोकल खाद-बीज भरकर बेचने की शिकायतें भी प्रशासन को मिली हैं।
