शाजापुर आबकारी विभाग में रार: बिना कलेक्टर के अनुमोदन के टेंडर जारी, नियमों की अनदेखी पर छिड़ा विवाद

शाजापुर, अग्निपथ। शाजापुर जिले में प्रशासन और आबकारी विभाग के बीच तनातनी का एक नया मामला सामने आया है। जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही पर आरोप लगा है कि उन्होंने टेंडर समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर के आधिकारिक अनुमोदन के बिना ही शराब ठेकों की निविदाएं (टेंडर) जारी कर दीं। जिले के 180 करोड़ रुपये के शेष ठेकों की प्रक्रिया को लेकर उपजा यह विवाद अब प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

पुरानी अदावत और हाई कोर्ट का दखल

यह पहला अवसर नहीं है जब कलेक्टर और आबकारी अधिकारी रंगशाही के बीच टकराव की स्थिति बनी हो। इससे पूर्व भी कलेक्टर ने शासकीय कार्यों में लापरवाही के चलते रंगशाही को निलंबित कर दिया था। हालांकि, इस निलंबन को अधिकारी ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जहाँ से उन्हें राहत मिली और कोर्ट ने निलंबन को अनुचित ठहराते हुए उन्हें पुनः पदभार ग्रहण करने का आदेश दिया। पद संभालने के तुरंत बाद ही आबकारी अधिकारी ने जिले के शेष बचे ठेकों की प्रक्रिया शुरू की, जो अब एक नए विवाद के केंद्र में है।

नियमों की पेचीदगी और अनुमोदन का संकट

नियमानुसार, जिला स्तरीय टेंडर समिति के पदेन अध्यक्ष जिले के कलेक्टर होते हैं। किसी भी निविदा को सार्वजनिक करने या ‘लाइव’ करने से पहले समिति के अध्यक्ष का लिखित अनुमोदन अनिवार्य होता है। ताजा मामले में कलेक्टर रिजु बाफना का कहना है कि शराब ठेकों की ‘रिग्रुपिंग’ (पुनः समूह निर्धारण) के लिए उनसे कोई स्वीकृति नहीं ली गई। कलेक्टर के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया सुबह 10 बजे ऑनलाइन लाइव हो गई थी, जबकि संबंधित फाइल उनके पास दोपहर 2 बजे हस्ताक्षर के लिए लाई गई। इसे सीधे तौर पर प्रक्रियात्मक चूक और नियमों की अनदेखी माना जा रहा है।

करोड़ों के राजस्व का दांव

शाजापुर जिले में शराब ठेकों के माध्यम से राज्य सरकार ने कुल 223 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिले में कुल 62 शराब की दुकानें हैं, जिनमें से अब तक केवल 21 दुकानों (लगभग 43 करोड़ रुपये) के ठेके ही अंतिम रूप ले पाए हैं। शेष 180 करोड़ रुपये के राजस्व वाले ठेकों की नीलामी प्रक्रिया अभी जारी है। इसी महत्वपूर्ण चरण में नियमों के उल्लंघन के आरोपों ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

आबकारी अधिकारी की सफाई: ‘कमिश्नर से मिली अनुमति’

दूसरी ओर, जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने नियमों का पालन किया है। उनका तर्क है कि पिछले दो दिनों से फाइल लगातार अनुमोदन के लिए कलेक्टर कार्यालय और बंगले पर भेजी जा रही थी, लेकिन वहां से कुछ आपत्तियां (क्वेरी) लगाकर फाइल लंबित रखी गई। रंगशाही के अनुसार, समय की कमी को देखते हुए उन्होंने अनुमोदन की प्रतीक्षा में सभी आवश्यक दस्तावेज आबकारी विभाग के कमिश्नर को भेजे, जहां से अनुमति मिलने के बाद ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

फिलहाल, जिले के शीर्ष अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी के कारण राज्य सरकार के करोड़ों रुपये के राजस्व से जुड़ी यह प्रक्रिया विवादों के घेरे में है। अब देखना यह होगा कि शासन स्तर पर इस प्रशासनिक खींचतान का क्या समाधान निकलता है।

Next Post

भाजपा नगर मंडल की नई कार्यकारिणी घोषित: सुदीप प्रजापति की टीम में युवा और अनुभवी चेहरों को मिली जगह

Sat Mar 21 , 2026
सीहोर, अग्निपथ। भारतीय जनता पार्टी के संगठन को निचले स्तर तक और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से सीहोर नगर मंडल-01 की नई कार्यकारिणी की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। नगर अध्यक्ष सुदीप प्रजापति ने वरिष्ठ नेतृत्व की सहमति से अपनी टीम का विस्तार करते हुए ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को […]

Breaking News