शाजापुर जिला अस्पताल में बदइंतजामी देख भड़के संयुक्त संचालक: गेट पर न स्ट्रेचर मिले न व्हीलचेयर

शाजापुर, अग्निपथ। सरकारी दावों और धरातल की हकीकत के बीच का अंतर उस समय साफ नजर आया, जब स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ संयुक्त संचालक एम.के. जोशी जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे। अस्पताल की दहलीज पर कदम रखते ही बदइंतजामी की जो तस्वीर सामने आई, उसने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मुख्य द्वार पर मरीजों के लिए न व्हीलचेयर थी और न ही स्ट्रेचर। इस गंभीर लापरवाही पर संयुक्त संचालक का पारा चढ़ गया और उन्होंने स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी कि मरीजों की सेवा में कोताही अब बर्दाश्त नहीं होगी।

सुरक्षा से खिलवाड़: एक्सपायरी डेट के भरोसे पैथोलॉजी

निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली स्थिति पैथोलॉजी कक्ष में देखने को मिली, जहां सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ती नजर आईं। आग से बचाव के लिए लगाए गए अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) सिर्फ शो-पीस बने हुए थे। यंत्रों पर न तो जांच की तारीख दर्ज थी और न ही उनकी वैधता का कोई रिकॉर्ड था। सुरक्षा के साथ इस बड़े खिलवाड़ पर कड़ी आपत्ति जताते हुए संयुक्त संचालक ने तत्काल फायर ऑडिट कराने और संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।

आईसीयू और एनआरसी में संसाधनों का टोटा

अधिकारी जब आईसीयू और पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) पहुंचे, तो वहां भी अव्यवस्थाओं का अंबार मिला। आईसीयू में दवाओं के रखरखाव में अनियमितता पाई गई, वहीं एनआरसी में व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप नहीं थीं। संयुक्त संचालक ने वार्डों में जाकर सीधे मरीजों और उनके परिजनों से संवाद किया और अस्पताल के दावों की जमीनी सच्चाई जानी। उन्होंने साफ-सफाई और दवाओं की उपलब्धता को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।

व्यवस्था सुधारने की दो टूक चेतावनी

संयुक्त संचालक एम.के. जोशी ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया कि आपात स्थिति में आने वाले मरीजों की जान से खिलवाड़ कतई मंजूर नहीं है। उन्होंने तत्काल नए स्ट्रेचर और व्हीलचेयर मंगवाने के निर्देश देते हुए कहा कि निरीक्षण का उद्देश्य केवल कमियां निकालना नहीं, बल्कि व्यवस्थाओं को जनहित में चुस्त-दुरुस्त करना है। ड्यूटी में किसी भी प्रकार की शिथिलता पाए जाने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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