वार्ड-3 की राशि वार्ड-17 को देने पर विवाद
उज्जैन, अग्निपथ। नगर निगम के विशेष सम्मेलन में सोमवार को वार्ड-3 में प्रस्तावित सामुदायिक भवन के स्थान परिवर्तन के मुद्दे ने जमकर तूल पकड़ा। मुख्यमंत्री अधोसंरचना निर्माण योजना के अंतर्गत वार्ड-3 के लिए 50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी। आरोप है कि वार्ड-3 के पार्षद पंकज चौधरी एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी भवन के लिए उपयुक्त जमीन नहीं खोज पाए। राशि लैप्स होने से बचाने के लिए विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने पत्र लिखकर इस भवन का स्थान बदलकर वार्ड-17 करने का प्रस्ताव दिया था। एमआईसी (MIC) ने इसे मंजूरी देकर सदन में रखा, जहाँ सत्तापक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने विधायक के इस हस्तक्षेप की तीखी आलोचना की।
सदन में बहस और पार्षद का यू-टर्न
चर्चा के दौरान वार्ड-3 के भाजपा पार्षद पंकज चौधरी ने पहले तो पूरक प्रस्ताव रखा कि भवन उनके वार्ड में ही बनना चाहिए। लेकिन जैसे ही चर्चा का समय आया, वे महापौर मुकेश टटवाल से बातचीत करने चले गए और बाद में अपना प्रस्ताव वापस ले लिया। इस पर पार्षद हेमंत गहलोत ने चुटकी लेते हुए कहा कि उन पर मानसिक दबाव है।
नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल किया कि क्या सदन के विशेष आमंत्रित सदस्य (विधायक) पार्षदों से अधिक शक्तिशाली हो गए हैं? आश्चर्यजनक रूप से वार्ड-17 की पार्षद राखी कड़ैल ने भी अपने वार्ड में भवन बनाए जाने का समर्थन नहीं किया, जिससे मामला और उलझ गया।
निगम अध्यक्ष के आसन पर बैठ गए पार्षद दुबे
बैठक की शुरुआत में एक अजीबोगरीब स्थिति निर्मित हुई। सुबह 11:30 बजे जब सम्मेलन प्रारंभ हुआ, तब सभापति कलावती यादव आसन पर उपस्थित नहीं थीं। उनकी आसंदी खाली देख पार्षद रामेश्वर दुबे वहां जाकर बैठ गए। जैसे ही सभापति का आगमन हुआ, दुबे सकपका कर वहां से हट गए। निगम के गलियारों में इस घटना की खासी चर्चा रही।
जानकारों का कहना है कि यदि अध्यक्षीय पैनल में नाम हो, तभी सभापति की अनुपस्थिति में आसंदी पर बैठा जा सकता है। इस संबंध में पार्षद दुबे से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल उपलब्ध नहीं हो सका।
पुनः एमआईसी को भेजा गया प्रस्ताव
भवन निर्माण के मुद्दे पर एमआईसी सदस्य शिवेंद्र तिवारी ने विधायक का बचाव करते हुए कहा कि वे सदन के सम्मानित सदस्य हैं और उनके लिए अभद्र भाषा का प्रयोग अनुचित है। वहीं कांग्रेस पार्षद माया त्रिवेदी ने वार्ड-3 में ही भवन बनाने की मांग का समर्थन किया। महापौर मुकेश टटवाल ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए निगमायुक्त से जवाब मांगा।
अंत में सभापति ने निर्देश दिए कि निगमायुक्त स्वयं स्थल निरीक्षण करें और नया प्रस्ताव बनाकर पुनः एमआईसी को भेजें। इसी बीच जानकारी सामने आई है कि पार्षद पंकज चौधरी ने अब पञ्चेश्वर महादेव के पास जमीन देख ली है, जबकि पहले प्रस्तावित जमीन रेलवे विभाग की निकली थी।
