सिंहस्थ से पहले बदनावर-टिमरवानी फोरलेन तैयार करना चुनौतीपूर्ण

बदनावर, (अल्ताफ मंसूरी) अग्निपथ। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को जोडऩे वाली बदनावर-थांदला-टिमरवानी (एनएच-752 डी) फोरलेन परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद 3,839 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी योजना ने गति पकड़ ली है। 80 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का निर्माण आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 27 मार्च 2028 से उज्जैन में शुरू होने वाले इस महापर्व के लिए अब केवल 23 माह का समय शेष है। इतने कम समय में काम पूरा करना बड़ी चुनौती है।

परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। तहसीलदार सुरेश नागर के अनुसार, बदनावर क्षेत्र के 14 गांवों की लगभग 110.58 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जा रही है। इसमें कृषि और शासकीय दोनों प्रकार की भूमि शामिल है। प्रभावित किसानों को अप्रैल माह से मुआवजा वितरण का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने स्पष्ट किया है कि टेंडर प्रक्रिया जारी है और अनुबंध होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। 24 माह की निर्धारित समय सीमा के भीतर 80 किलोमीटर सडक़, 6 प्रमुख पुल और 34 लघु पुलों का निर्माण पूरा करना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि सिंहस्थ से पहले इस मार्ग को खोलना अनिवार्य है।

ग्रीनफील्ड-ब्राउनफील्ड मॉडल और आधुनिक तकनीक

इस मार्ग को ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। इसका अर्थ है कि कुछ हिस्सों में पुरानी सडक़ का चौड़ीकरण होगा, जबकि कुछ हिस्सों में पूरी तरह से नया मार्ग तैयार किया जाएगा। वर्तमान में इस मार्ग पर वाहनों की औसत गति महज 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है, लेकिन फोरलेन बनने के बाद यह बढक़र 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी। इससे न केवल यात्रा का समय आधा हो जाएगा, बल्कि ईंधन की भी भारी बचत होगी।

परियोजना से होने वाले प्रमुख लाभ

इस फोरलेन हाईवे के निर्माण से क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं-

  • सिंहस्थ श्रद्धालुओं के लिए सुगम मार्ग: गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से उज्जैन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह सबसे प्रमुख और तीव्र मार्ग साबित होगा।
  • औद्योगिक विकास को पंख: यह मार्ग धार जिले के पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क से होकर गुजरेगा, जिससे कपड़ा उद्योग को वैश्विक स्तर की कनेक्टिविटी मिलेगी।
  • लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: इंदौर, पीथमपुर, उजैन और देवास जैसे औद्योगिक केंद्रों के लिए माल परिवहन आसान होगा, जिससे व्यापारिक लागत घटेगी।
  • रोजगार के नए अवसर: आदिवासी अंचलों से गुजरने वाले इस मार्ग के कारण स्थानीय स्तर पर व्यापार, ढाबा उद्योग और परिवहन क्षेत्र में रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे। मेट्रो शहरों से जुड़ाव: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधा जुड़ाव होने के कारण बदनावर क्षेत्र की पहुंच देश के बड़े महानगरों तक सीधी हो जाएगी।

14 गांवों की भूमि होगी अधिग्रहित

इस वृहद निर्माण कार्य के लिए बदनावर क्षेत्र के जिन गांवों की भूमि ली जा रही है, उनमें प्रमुख रूप से खीमाखेड़ी, खेड़ा, शंभूपाड़ा, चंदवाडिय़ा खुर्द, संदला, दोतरिया, बखतपुरा, भैंसोला, सेमलखेड़ा, खरडिय़ा, छायां, लिलीखेड़ी, चंदवाडिय़ा और बदनावर शामिल हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मुआवजे की राशि सीधे किसानों के खातों में अंतरित की जाएगी।

केंद्रीय सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 10 अप्रैल 2025 को किए गए भूमिपूजन के बाद से ही क्षेत्र की जनता में इस प्रोजेक्ट को लेकर भारी उत्साह है। अब सबकी निगाहें निर्माण की गति पर टिकी हैं, ताकि सिंहस्थ 2028 की शुरुआत से पहले यह प्रगति का पथ बनकर तैयार हो सके।

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